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साधन सहकारी समितियों से गायब हुई यूरिया

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साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब
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80 फीसदी समितियों में नहीं है उर्वरक, किसानों में हाहाकार
जिला प्रबंधक पीसीएफ पर एआर-कोआपरेटिव ने लगाया लापरवाही का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
खरीफ की प्रमुख फसल धान के लिए जिले में यूरिया का संकट उत्पन्न हो गया है। धान की फसलों की निराई करने के बाद किसानों को उर्वरक की जरूरत हुई तो साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब हो गई। इसे लेकर किसान एक से दूसरी समिति का चक्कर काट रहा है। समितियों में यूरिया नहीं मिलने से किसानों हाहाकार मचा हुआ है। समितियों से गायब यूरिया के मामले में एआर-कोआपरेटिव पीसीएफ के जिला प्रबंधक की लापरवाही बता रहे हैं।ेेेे
खरीफ की प्रमुख खेती धान के लिए किसानों को उर्वरक के रूप में सबसे अधिक यूरिया की जरूरत होती है। खेतों में धान की रोपाई का काम लगभग पूरा हो जाने के बाद किसानों को अब यूरिया की जरूरत पड़ने लगी है। किसानों की जरूरत के ऐन वक्त पर जिले की 64 साधन सहकारी समितियों में से 80 फीसदी में स्टॉक ही नहीं है। इससे किसानों में यूरिया को लेकर हाहाकार मच गया है। हालांकि विभाग महज पचास फीसदी समितियों में उर्वरक न होने की बात कह रहा है। जिन समितियों में यूरिया उपलब्ध है वहां भी किसानों की लंबी लाइन लग रही है। उर्वरक के लिए वे समितियों में मारा-मारी करने को तैयार हैं। उधर पीसीएफ के अधिकारियों ने 12 सौ मीट्रिक टन यूरिया की मांग की है। यूरिया भेजी नहीं गई है। इससे खाद का संकट बना हुआ है। किसानों का कहना है कि समय पर यूरिया का छिड़काव नहीं हो पाने से उनकी पैदावार के प्रभावित होने का खतरा है।
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इनसेट
निजी दुकानों से महंगी यूरिया खरीद रहे किसान
80 फीसदी साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब होने के बाद किसानों के सामने विकराल समस्या खड़ी हो गई है। उनकी इस मजबूरी का फायदा निजी उर्वरक दुकानदार उठा रहे हैं। उर्वरक के अभाव को देखते हुए किसान बोरी में ढोके के रूप में तब्दील यूरिया को लेने से गुरेज नहीं कर रहे वहीं दुकानदार उनसे 20 से 40 रुपए अधिक वसूल रहे हैं।



नकली उर्वरक की बिक्री जोरों पर
साधन सहकारी समितियों में यूरिया का संकट खड़ा होते ही नकली उर्वरक की बाजार में भरमार हो गई है। सरायअकिल, पिंडरा चौराहा, बेनीराम कटरा, नेवादा, पुरखास, तिल्हापुर मोड़, मनौरी सहित कई प्रमुख बाजारों में नकली यूरिया की खेप उतर चुकी है। समितियों में खाद न मिलने से किसान नकली यूरिया को महंगे दाम में खरीदकर खेतों में डाल रहा है। इससे उसे दोहरी चपत लग रही है। एक तरफ किसान की जेब भी खाली हो रही है और दूसरी ओर फसल को फायदा भी नहीं हो रहा है। कृषि विभाग के जिम्मेदार हैं कि वे अपने-अपने कार्यालय में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। जिले में बिक रही नकली उर्वरक से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिले की कुल 64 साधन सहकारी समितियों में से 30 में यूरिया नहीं है। इसे लेकर जिला प्रबंधक पीसीएफ को तलब किया गया है। दो दिन के भीतर हर हाल में समितियों में खाद पहुंचा दी जाएगी। किसानों को उर्वरक के लिए भटकने की जरूरत नहीं है। निजी दुकानों में बिक रही नकली यूरिया कृषि अधिकारियों के क्षेत्र में आती है। इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है।
अजीत कुमार सिंह
एआर-कोआपरेटिव
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