मंझनपुर। प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के लिए युवक-युवतियां खोजने में पसीना छूट रहा है। तीन गुना से अधिक लक्ष्य बढ़ने के कारण सभी निकायों और ग्राम पंचायतों को दूल्हा और दुल्हन खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निकायों के ईओ को कम से कम 30 और ग्राम पंचायतों के प्रधानों को दो-दो शादी योग्य युवक-युवतियां तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है।
पिछले साल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चालू की थी। इसके तहत शहरी क्षेत्र के 56460 और ग्रामीण इलाके के 46080 रुपये साला आमदनी वाले परिवारों की बेटियों के हाथ पीले कराए जाते थे। योजना के तहत शादी करने वाली बेटियों को 35 हजार रुपये का अनुदान भी मुहैया कराने का प्रावधान है। इसमें 20 हजार रुपये बेटी के नाम बैंक खाते में भेजा जाता है। जबकि दस हजार रुपये के उपहार व पांच हजार रुपये आयोजन में खर्च करने की व्यवस्था है। इस बार योजना में कुछ बदलाव किया गया है। सरकार ने शहरी और सभी ग्रामीण क्षेत्रों में आमदनी की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी है। साथ ही लक्ष्य 15 सौ कर दिया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में अफसरों को पसीने छूट रहे हैं। लिहाजा जिले में सातों निकायों को 30-30 व सभी 498 ग्राम पंचायतों को कम से कम दो-दो जोड़े तलाशने का जिम्मा सौंपा गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार का कहना है कि आय सीमा बढ़ने की वजह से लक्ष्य हासिल करने में आसानी होगी। सभी ईओ और ग्राम प्रधानों को इसके लिए जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
योजना के तहत इस साल अभी तक सिर्फ 79 जोड़ों की ही शादी कराई जा सकी है। लक्ष्य पूरा करने के लिए विभाग को सहालग का इंतजार है। विभागीय अफसर इसके लिए दिसंबर, जनवरी और फरवरी की शुभ मुहूर्तों की तलाश कर रहे हैं। पिछले साल योजना के तहत 476 बेटियों के हाथ पीले कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पर, तमाम कवायद के बावजूद सिर्फ 300 शादियां ही कराई जा सकी थी। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार का कहना है कि योजना नई होने के कारण थोड़ी दिक्कतें हुई थी। पर, इस मर्तबा हर हाल में लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। सामूहिक विवाह में अधिकतर परिवार के लोग व वर-वधू शामिल होने से कतराते हैं। सूत्रों की मानें तो वर-वधू इसके लिए तैयार नहीं होते हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि सामूहिक विवाह में जो रीति-रिवाज होते हैं वह सही से नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा सामाजिक मान-प्रतिष्ठा भी बाधक बनती है।