दलित वोट में सपा की बड़ी सेंध
टशन का लाभ उठाने वाले पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री के समर्थक भी फंसे
अब एक मंच पर होंगे इंद्रजीत और शैलेंद्र, असमंजस में हैं समर्थक
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
कौशांबी की तीनों सीट दलित बाहुल्य है। दलित वोट ही निर्णायक होता है। इस पर मुस्लिम वोट सोने पर सुहागा पर माना जाता था। अब सपा में इंद्रजीत सरोज के आने से स्थितियों में बड़ा बदलाव दिखने लगा है। दलित वोट में सपा के पूर्व सीएम अखिलेश ने बड़ी सेंध लगा दी है। इससे बसपा का कैडर में भी तितर-बितर हो सकता है। इसकी प्रबल संभावना को देखते हुए बसपाई सक्रिय हो चुके हैं। वहीं अभी तक सरोज बिरादरी इंद्रजीत व पूर्व सांसद शैलेंद्र के पाले में बंटी थी। अब वे समर्थक नए सिरे से विचार करने में जुट गए हैं जो पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री की टशन का फायदा उठाकर उनके झंडा बरदार बने थे।
सिराथू सीट से पहली बार भाजपा से केशव मौर्य ने वर्ष 2012 में खाता खोला था। इसके बाद वह फूलपुर से सांसद हो गए थे। वर्ष 2014 में हुए उपचुनाव में सपा से वाचस्पति जीते। जिले में पहली मर्तबा सपा का खाता सिराथू सीट से खुला था। यह तब हुआ था जब भाजपा प्रत्याशी संतोष पटेल के सामने बसपा ने अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। इस जीत के बाद से पूर्व सीएम अखिलेश यादव की नजर यहां गड़ी थी। बसपा के चक्रव्यूह तोड़ने की कोशिश में भाजपा के साथ सपा भी जुटी थी। मौका भी जल्द मिला और सूत्रधार बने इंद्रजीत सरोज। इंद्रजीत सरोज के समर्थकों से सपा मुखिया अखिलेश यादव वाकिफ थे। यही कारण था कि मौका मिलते ही उन्होंने इंद्रजीत को गंवाने की गलती नहीं की। तीनों सीटों पर दलितों का वोट सबसे ज्यादा है। इसमें भी सरोज बिरादरी भारी है। पहले यह वोट सपा के पूर्व सांसद शैलेंद्र व इंद्रजीत सरोज के बीच बंटा था। अब दोनों एक मंच पर आ गए हैं। शैलेंद्र का लोकसभा चुनाव लड़ना तय है, लेकिन इंद्रजीत सरोज अपनी पुरानी सीट मंझनपुर से ही विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। वर्ष 2012 में वह चार हजार वोट से जीते थे। निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा के शिवमोहन चौधरी ने तगड़ी टक्कर दी थी। 2017 के चुनाव में वह मामूली मतों से हारे हैं लेकिन अब इंद्रजीत की राह में फिलहाल कोई कांटा नहीं दिख रहा है। इंद्रजीत को सपा में जाने से जहां खुद का फायदा हुआ है वहीं पार्टी को एकमुश्त सरोज बिरादरी के साथ ही उनके समर्थकों का भी वोट मिलेगा। सपा को इंद्रजीत सरोज के आने से तीनों ही सीटों पर काफी राहत मिल सकती है। मगर बसपा को कठिनाइयों से जूझना पड़ सकता है। सरोज बिरादरी के काफी वोट उससे बिदक सकते हैं। इसके बावजूद बसपा के लिए गुंजाइश यह बची है कि सरोज बिरादरी के वोटों का बंटवारा पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री की टशन को लेकर था। इंद्रजीत सरोज से नाराज लोग शैलेंद्र के साथ थे और शैलेंद्र से नाराज लोग इंद्रजीत के खेमे में। अब यह समर्थक क्या करेंगे। दोनों की मौजूदगी में वे सपा का झंडा लहराएंगे अथवा कोई दूसरा तरीका अख्तियार करेंगे। इसको लेकर राजनीतिक पंडितों के बीच भी तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
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इंद्रजीत सरोज के समर्थकों ने इस्तीफा की हवा उड़ाकर लंबी चौड़ी लिस्ट जारी की थी। गुरुवार को यह तस्वीर साफ हो गई है। लखनऊ जाने वाले समर्थकों में पूर्व मंत्री के ठेकेदार व उनके कारखास थे। बसपा कार्यकर्ता नहीं। बसपा के कार्यकर्ता बूथ व सेक्टर को मजबूत करने में जुटे हैं। जल्द ही सपाइयों को भी हकीकत का अहसास हो जाएगा।
राजू गौतम
जोनल कोआर्डिनेटर (बसपा)