बाजारों से गायब है फलों की रानी ककड़ी
मौसम की मार के चलते नहीं तैयार हो सकी फसल
कालका से लेकर महाराष्ट्र तक जाती है दोआबा की ककड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा में इस बार अभी तक बाजारों में फलों की रानी ककड़ी गायब है। यह सब मौसम की मार के चलते हुआ है। बाजारों से गायब होने के कारण ककड़ी के शौकीन मायूस हैं। खेती करने वाले किसान भी फसल खराबी की बात कह रहे हैं।
सेहत के लिए फायदेमंद ककड़ी अधिक गर्मी में प्यास को कम करती है। इसको खाने से सेहत के साथ-साथ त्वचा पर निखार रहता है। मार्च की महीना पूरी तरह से खत्म हो चुका है। लेकिन बाजारों में यह फल अभी दिखाई नहीं दे रहा है। इसकी वजह खेती करने वाले लोग और अन्य कारोबारी मौसम की मार को बता रहे हैं। उनका कहना है कि ककड़ी के फसल की पहली बुआई अक्तूबर महीने में होती है। यदि कुछ किसान किसी कारणवश अक्तूबर में फसल की बुआई नहीं कर सके तो जनवरी तक फसल बोने की तैयारी कर लेते हैं। इसके बाद मार्च की शुरुआत में यह फसल तैयार होकर बाजारों में आ जाती है। ठंड के मौसम में इस फसल की बुआई दोमट मिट्टी अथवा रेत में होती है। इस वर्ष कम ठंड पड़ने के कारण किसानों ने फसल की बुआई नहीं किया है। इस कारण से यह फसल अभी तक लोगों के बीच नहीं पहुंच सकी है। इससे ककड़ी के शौकीन मायूस हैं। किसान संजय निषाद और पिंटू मौर्या का कहना है कि दोआबा में उगाई जाने वाले फलों की रानी ककड़ी की सप्लाई हिमांचल के कालका और महाराष्ट्र व गुजरात के वड़ोदरा इलाके तक होती है।