अदालत के निर्देश पर दर्ज होने वाले गंभीर अभियोगों की जांच में लेट-लतीफी करना अब महंगा पड़ेगा। विवेचकों को किसी भी कीमत पर 24 घंटे के भीतर केस की असलियत सामने लानी होगी। विवेचना का निस्तारण भी अति शीघ्र करना होगा। एडीजी के निर्देश पर एसपी ने सभी क्षेत्राधिकारियों, निरीक्षकों व उपनिरीक्षकों को इस बाबत जरूरी दिशा-निर्देश दे दिया है।
लंबित विवेचनाओं के निस्तारण में कौशाम्बी ही नहीं पूरे प्रदेश की स्थिति खराब है। अभी 13 नवम्बर को अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवा) ने लखनऊ में समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्हें पता चला कि कोर्ट के निर्देश पर दर्ज होने वाले गंभीर अभियोगों की विवेचना में विवेचक हद से ज्यादा ढिलाई करते हैं। इसे लेकर एडीजी का पारा गरम हो गया। उन्होंने अदालत के निर्देश पर दर्ज होने वाले मुकदमों की विवेचना अतिशीघ्र निस्तारित करने का निर्देश दिया है।
सभी पुलिस अधीक्षकों को भेजे गए पत्र में कहा है कि कोर्ट के आदेश पर हत्या, लूट, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न जैसे बड़े मामले दर्ज होते हैं तो विवेचक 24 घंटे के भीतर यह साफ करें कि आरोपों में दम कितना है। आरोप निराधार हैं तो केस खत्म कर दिया जाए। धाराएं कम-ज्यादा हैं तो उन्हें बढ़ा-घटा दिया जाएग। कुल मिलाकर विवेचना के निस्तारण में देरी नहीं होनी चाहिए। ऐसा हुआ तो विवेचक की खैर नहीं होगी।
फर्जी मामलों में वादी पर कार्रवाई
मंझनपुर। एडीजी ने साफ कहा है कि 24 घंटे के भीतर जांच करके आरोपों की असलियत पता करें। अगर आरोप पूर्णतया निराधार मिलें तो केस दर्ज कराने वाले के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। माना जा रहा है कि विवेचकों ने ऐसा किया तो इससे तमाम बेगुनाह जेल जाने से बचेंगे। लोग फर्जी केस दर्ज कराने से भी बचेंगे।
एसपी ने सभी को दिए सख्त निर्देश
मंझनपुर। एसपी प्रदीप गुप्ता ने सभी क्षेत्राधिकारियों, निरीक्षकाें और उप निरीक्षकों को गुरुवार को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने एडीजी तकनीकी सेवा के निर्देश का कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया है। चेताया है कि मनमानी करने पर सीधे लाइन का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
कोर्ट के साथ सीधे तौर पर दर्ज होने वाले मामलों की विवेचना भी समय पर निस्तारित करने का निर्देश मातहतों को दिया गया है। एडीजी तकनीकी सेवा के निर्देश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
प्रदीप गुप्ता-एसपी