मंझनपुर। शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटने के बाद एक बार फिर कौशाम्बी के लोग कंधे पर बंदूक व कमर में रिवाल्वर खोसने के लिए लालायित हो गए हैं। थाने से लेकर शस्त्र अनुभाग में पुरानी फाइलों को फिर से निकलवाने की कवायद तेज हो गई है।
बताया जाता है कि कौशाम्बी के लोगों की पसंद में असलहा भी है। यहां असलहा सुरक्षा के लिए कम बल्कि रोजगार और शौक के लिए ज्यादा लिया जाता है। हालात यह हैं कि पहले लोगों ने एक-एक लाख रुपये खर्च कर शस्त्र का लाइसेंस लिया था। नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने में रोक लगा दी गई थी। इसके चलते करीब चार हजार शस्त्र पत्रावलियां थाने या फिर शस्त्र अनुभाग में धूल फांक रही हैं। अब प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 की नीति के तहत लाइसेंस जारी करने का फरमान जारी कर दिया है। खासकर व्यापारी, बैंकिंग संस्थान, सैनिक, विधायक, सांसद व राज्य सभा सदस्यों को लाइसेंस देने में वरीयता देने की बात कही गई है। इसके अलावा अपराध से पीड़ित व्यक्ति को भी लाइसेंस देने को प्राथमिकता में शामिल करने के लिए कहा गया है। इसे लेकर शस्त्र अनुभाग में छाया सन्नाटा छटने लगा है। आम दिनों की अपेक्षा मंगलवार को भीड़ ज्यादा दिखी। विभागीयआंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में करीब 16 हजार लोगों के पास शस्त्र लाइसेंस है। अभी तक सिर्फ वरासत के लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। नए आवेदन पर विचार करना तो दूर उनकी पत्रावलियां स्वीकार तक नहीं की जा रही थी। अब शासन से रोक हटने के बाद लोगों को फिर से शस्त्र लाइसेंस मिलने की उम्मीद जग गई है।
मंझनपुर। कौशाम्बी के लोगों का मुख्य पेशा खेती है। यहां पर व्यापार और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते है। पिछले कुछ सालों से सिंचाई और बिजली की समस्या के चलते खेती का काम भी ठीक से नहीं चल रहा है। नतीजतन यहां के बेरोजगार शस्त्र लाइसेंस कराकर मुंबई, दिल्ली, गुजरात आदि महानगरों में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने के लिए मजबूर हैं। वहां उन्हें शस्त्र लेकर जाने पर 25 से 35 हजार रुपये की नौकरी मिल जाती है। शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करने के दौरान पुलिस से शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त करना होता था। आवेदक को किसी परिचित का शस्त्र लेकर प्रमाण पत्र बनवान के लिए लाना होता था। अब इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। वहीं डीएम का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने के लिए कुछ शर्तो के साथ रोक हटा दी गई है। सरकार के निर्देशानुसार ही लाइसेंस जारी किए जाएंगे। -मनीष कुमार वर्मा. डीएम