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40 में सिर्फ चार स्टॉफ नर्स

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चालीस में सिर्फ चार स्टॉफ नर्स
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फोटो नं-4 से 11 तक
-आठ बरस बाद भी नहीं पूरा हुआ जिला अस्पताल में कर्मचारियों के तैनाती का मानक
-नाक-कान-गला, हृदय और स्किन रोग विशेषज्ञों के साथ ही कार्डियोलॉजिस्ट के भी पद खाली
मनोज दुबे
मंझनपुर।
बीस लाख की आबादी की सेहत की देखरेख के लिए मुख्यालय में 10 करोड़ की लागत से जिला अस्पताल का निर्माण कार्य कराया गया। आठ बरस बीतने के बावजूद विशेषज्ञों के साथ स्टाफ नर्सों की तैनाती का मानक नहीं पूरा हो सका है। 40 पदों के सापेक्ष सिर्फ चार स्टॉफ नर्स संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात हैं। वहीं, आधा दर्जन विशेषज्ञ डॉक्टरों के भी पद खाली हैं।
द्वाबा में गरीबों के इलाज के लिए वर्ष 2009 में 9.45 करोड़ रुपए की लागत से संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण कराया गया है। जहां बीते आठ साल से चिकित्सकों के अभाव में गंभीर रोगियों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। जबकि अस्पताल में विशेषज्ञों के कुल 30 पद और स्टाफ नर्स के 40 पद सृजित है। इसमें से 24 चिकित्सक के साथ सिर्फ 04 स्टॉफ नर्स ही अब तक तैनाती है। जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्सों की कमी के साथ नाक-कान-गला, हृदय रोग और स्किन रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट समेत छह पदों पर विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई। जिसे लेकर लोग इलाहाबाद जाकर निजी अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर है।
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तैनात विशेषज्ञों पर एक नजर
ईएमओ 03
सर्जन 02
फिजीशियन 02
बाल रोग विशेषज्ञ 02
स्त्री रोग विशेषज्ञ 02
अर्थो सर्जन 02
नेत्र सर्जन 02
डेंटल विशेषज्ञ 01
रेडियोलॉजिस्ट 02
पैथालॉजी 02
एक्सरे टैक्नीशिएन 01
एनेथेटिक्स 01
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रिक्त विशेषज्ञों के पद
नाक-कान गला रोग विशेषज्ञ
काईड्रोलॉजिस्ट
ईसीजी
फिजीयोथेरेपी
स्किन रोग विशेषज्ञ
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बर्न यूनिट में लगा ताला
फोटो नं-
संयुक्त जिला अस्पताल में बर्न यूनिट का भवन तो बनकर तैयार हो गया है। पर यहां अभी तक सुविधाओं का आभाव बना हुआ है। बर्न यूनिट के चालू नहीं होने से आग की जद में आने वाले मरीज इलाज के आभाव में इलाहाबाद पहुंचने से पहले दम तोड़ रहे है।
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अस्पताल की शोभा बढ़ा रहा शव गृह
फोटो...
जिला संयुक्त अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले मरीजों के शव को सुरक्षित रखने के लिए शव गृह का निर्माण कराया गया है। यह शव गृह सिर्फ अस्पताल की शोभा बढा रहा है। बताया जा रहा है कि आज तक इसमें किसी के शव को नहीं रखा गया।
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प्रसव कक्ष बना एमसीएस
फोटो...
जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैश करते हुए 100 बेड का महिला केयर सेंटर बनाया गया है। विभाग के अफसरों ने बिना विशेषज्ञों की तैनाती किए सेंटर को चालू करा दिया। जहां सिर्फ प्रसूताओं का प्रसव कराया जाता है। इसके अलावा कोई अन्य काम नहीं होता है।
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वार्ड ब्वाय के भरोसे ईसीसी और फिजियोथेरीपी
फोटो...
जिला अस्पताल में ईसीसी और फिजियोथेरेपी की जिम्मेदारी वार्ड ब्वाय के हाथ सौंप दी गई है। विशेषज्ञों के आभाव में पीड़ितों के साथ विभाग के जिम्मेदार छलावा कर रहे है। वार्ड ब्वाय को विशेषज्ञ समझ लोग उपचार कराने का दंश झेल रहे है। उन्हें क्या पता कि वह जिससे इलाज कराने गए वह डॉक्टर है या फिर वार्ड ब्वाय।
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सिटीस्कैन का भवन तैयार उपकरण गायब
फोटो...
कौशाम्बी के लोगों को अब सिटी स्कैन कराने के लिए इलाहाबाद का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। जिला संयुक्त अस्पताल में सिटी स्कैन का भवन बनकर तैयार हो गया है। पर, अभी तक विभाग द्वारा उपकरण की व्यवस्था नहीं की गई है। लोगों इस आस के साथ बैठे है कि आज नहीं तो कल शायद व्यवस्था उड़ा भरे।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा चुका है। कई विशेषज्ञों की तैनाती भी हो चुकी है। छह-सात पद बचे है प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही जिला अस्पताल में सभी विशेषज्ञों की तैनाती का मानक पूरा किया जाए। ताकि मरीजो को इधर-उधर भटकना पड़े।
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डॉ दीपक सेठ
सीएमएस, संयुक्त जिला चिकित्सालय
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सुविधाओं के साथ सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की तैनाती किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला अस्पतालों के साथ सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों की तैनाती का मानक जल्द पूरा करा दिया जाएगा। इसके लिए पांच हजार चिकित्सकों की तैनाती की योजना है।
सिद्धार्थ नाथ सिंह
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
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