डॉक्टरों की लापरवाही से अस्पताल बने बीमार
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-एमसीएच सेंटर में प्रसव को आईं गर्भवती महिलाओं को जमीन पर लिटाया
-आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पतालों की अधिकारी भी नहीं लेते सुधि
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
अस्पतालों में ताला लगाकर डॉक्टर व उनका स्टाफ गायब हो जाता है। ऐसे में मरीजों को भगवान ही बचाए। आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक अस्पताल के चिकित्सक कब आते हैं और कब नहीं, इसकी जानकारी वहां के चतुर्थ श्रेणी कर्मी को भी नहीं है। जिला अस्पताल में बने एमसीएच सेंटर का और बुरा हाल है। करोड़ों की लागत से बनकर तैयार इस भवन में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को बेड नहीं दिया जाता बल्कि उन्हें जमीन पर लिटाया जाता है। शुक्रवार को अमर उजाला ने करीब दस बजे स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल की तो हकीकत चौंकाने वाली रही।
जिला अस्पताल परिसर में 14 करोड़ की लागत से एमसीएच सेंटर बनकर तैयार हो गया है। इस भवन में फिलहाल प्रसव शुरू करा दिया गया है। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे एचसीएच सेंटर में आठ महिलाएं प्रसव के लिए जमीन पर लेटी हुई मिलीं। पूछने पर महिलाओं ने बताया कि उनके साथ आए परिजनों ने कई बार स्टाफ नर्स से कहा कि उनको बेड दिलाया जाए लेकिन स्टाफ नर्स का कहना है कि प्रसव के बाद ही उनको बेड दिया जाएगा। ऐसा नहीं है कि बेड खाली नहीं थे लेकिन स्टाफ नर्स की मनमानी के कारण उन्हें जमीन पर ही लेटना पड़ा। इससे तीमारदारों में गुस्सा था। जिला मुख्यालय में पाता रोड पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल स्थित है। शुक्रवार को करीब 11 बजे यहां ताला लटका था। आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. संतोष पांडेय के कार्यालय में ताल लगा था। दवा वितरण कक्ष में ताला लगा हुआ था। साफ-सफाई में जुटे सफाई कर्मचारी ने बताया कि उसे नहीं मालूम कब डॉक्टर साहब आएंगे। अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के बारे में उसने किसी तरह की जानकारी होने से इंकार कर दिया। इसी अस्पताल के सामने जिला होम्योपैथिक अस्पताल है। करीब 11:35 बजे यहां के भी डॉक्टर गायब मिले। उनके कार्यालय में ताला लगा था। बाकी के कर्मचारी भी गायब थे। देवरा के रामसजीवन दवा लेने आए थे लेकिन दूर से ही अस्पताल का नजारा देखकर वह वापस लौट रहे थे। पूछने पर बताया कि अंग्रेजी दवा खाने में उन्हें दिक्कत होती है। इसलिए यहां आए थे, अस्पताल ही बंद है तो क्या करें? अब वह निजी होम्योपैथिक अस्पताल जा रहे हैं दवा लेने। जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण इलाकों की क्या स्थिति होगी। बेखौफ होकर अस्पताल के कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं और अधिकारी तमाशा देख रहे हैं।
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ओडीएफ अभियान में लगाई गई डॉक्टर की ड्यूटी
आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार पांडेय की ड्यूटी ओडीएफ अभियान में लगाई गई है। इसका फायदा उठाकर वह गायब रहते हैं। शुक्रवार को अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने बताया कि साहब की ड्यूटी ओडीएफ अभियान में लगी है, इसलिए नहीं आ रहे हैं। बाकी के कर्मचारी क्यों नहीं आ रहे हैं, इस पर वह चुप्पी साध गया। डॉक्टर न तो अस्पताल में बैठ रहे हैं, न ही ओडीएफ अभियान को ही परवान चढ़ा पा रहे हैं। इसके बावजूद इनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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पहले लगती थी अस्पतालों में भीड़, भर्ती होते थे मरीज
आयुर्वेदिक अस्पताल में पहले मरीजों की भीड़ आती थी। चर्म रोग आदि के भी मरीज भर्ती किए जाते थे। करीब पांच साल से यह अस्पताल लगभग टूट चुका है। डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से यहां मरीज नहीं आते हैं। दवा का स्टॉक भी पर्याप्त नहीं दिया जाता है। दवा का वितरण कब होता है और किसको दिया जाता है, इसको लेकर हमेशा यह अस्पताल सवालों के घेरे में रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी अधिकारी इस ओर से आंख फेर कर बैठे हैं।
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डॉक्टरों की लापरवाही से बंद हो गए मेडिकल स्टोर
आयुर्वेदिक अस्पताल जब नियमित संचालित था तो इसके बगल में खुले आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर वालों की चांदी थी। इस अस्पताल की वजह से इनका अच्छा खासा कारोबार होता था लेकिन अब यह मेडिकल स्टोर बंदी की कगार पर हैं। मेडिकल स्टोर वाले कहते हैं कि अब तो कभी-कभार मरीज आते हैं। ज्यादातर मरीज खुद ही दवा लेने आते हैं। डॉक्टरों की गैरहाजिरी से मरीजों का इस अस्पताल से मोहभंग हुआ है।
क्या कहते हैं अधिकारी
‘ओडीएफ अभियान में डॉक्टर की ड्यूटी विभाग नहीं लगाता है। ड्यूटी लगकर आती है। यदि अस्पताल से डॉक्टर गायब थे और ताला लगा था, यह गंभीर मामला है। जांच करवाएंगे। जिला अस्पताल के एमसीएच सेंटर में गर्भवती महिलाओं को जमीन पर लिटाना भी गलत है। इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।’
डॉ. दीपेंद्र मालवीय
सीएमओ