खतरे से बाहर नहीं वारिस, परिजन परेशान
सऊदी अरब में हुए अग्निकांड में झुलसने के बाद से अस्पताल में है भर्ती
घर में रिश्तेदारों का तांता, मोबाइल से हालचाल ले रहे परिजन
अमर उजाला ब्यूरो
पइंसा।
सऊदीअरब में हुए आग हादसे में कौशांबी के भी दो युवक झुलस गए थे। इनमें गुलाम वारिस की हालत नाजुक है। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। बेटे की हालत चिंताजनक होने के कारण घर में उसके परिजन चिंतित हैं। रिश्तेदार परिजनों को सब्र बंधा रहे हैं। खाड़ी देश में हुए इस हादसे से परिजनों की नींद उड़ी है। उनकी अब यही इच्छा है कि बस उनका बेटा जल्द सकुशल घर वापस आ जाए।
सऊदीअरब के दक्षिण प्रांत नजरान के फैसलिया में पइंसा के जेहिदपुर निवासी गुलाम वारिस व मो. सादिक काम करते हैं। तीन दिन पहले जिस भवन में वे रहते थे वहां आग लग गई थी। भीषण अग्निकांड में गुलाम वारिस व मो. सादिक झुलस गए थे। सादिक ने एसी मशीन लगी खिड़की तोड़कर गुलाम वारिस समेत छह लोगों को बाहर निकाला था। ज्यादा झुलसने से वारिस की हालत नाजुक थी। वह आईसीयू वार्ड में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसकी खबर आने के बाद से परिजनों की नींद उड़ी है। बेटे की फिक्र में मां सन्नो, पिता अयूब का बुरा हाल है। पत्नी नौशीन बानों भी चिंता में डूबी है और आंसू बहाए जा रही है। दूरदराज से आने वाले रिश्तेदार ढांढस बंधाकर यही उम्मीद दिलाए हैं कि वह जल्द ही ठीक होकर घर लौटेगा। वारिस की अस्पताल से आ रही तस्वीरों को देखकर मां व पत्नी रोने लगती हैं। हालांकि सादिक ने यह कहकर पत्नी व मां को तसल्ली दे रखी है कि अब उसकी स्थिति बेहतर है। इसके बावजूद परिजनों को चिंता सताए जा रही है। गांव के लोग भी परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
सऊदीअरब में हैं जेहिदपुर के 40 लोग
सऊदीअरब के विभिन्न शहरों में जेहिदपुर गांव के 40 लोग हैं। यह कामगार वहां हाड़तोड़ मेहनत कर अपने परिजनों का भरण पोषण करते हैं। बेहतर जिंदगी देने के लिए यह वहां मेहनत करते हैं। इनको लेकर परिजन हमेशा चिंतित रहते हैं। सऊदीअरब से जुड़ी कोई भी खबर आने पर यह सहम जाते हैं। सऊदीअरब में हुए आग हादसे ने सभी को डरा दिया था। मो. सादिक के साथ इस गांव के अन्य युवक अस्पताल में हैं और वहां से गुलाम वारिस की पल-पल की जानकारी दे रहे हैं। वीडियोकालिंग के जरिए उसकी तस्वीर दिखाकर परिजनों को तसल्ली दी जा रही है।
रियाल और दिरहम के दम से चमक रहा है कौशाम्बी
अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गए हैं खाड़ी देश में काम करने वाले युवा
युवाओं की कमाई से कारोबार की बदली है दिशा
अमर उजाला ब्यूरो
सिराथू। जिले के लगभग तीन हजार युवा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग सऊदीअरब में हैं। इसके बाद कुवैत, दुबई समेत अन्य मुल्कों में लोग जमे हैं। सऊदी के रियाल व दुबई के दिरहम का ही दम है कि कौशाम्बी चमकने लगा है। वहां काम कर रहे युवाओं ने अपना रुपया भेजकर जिले के कारोबार की दिशा बदल दी है। हर महीने खाड़ी देशों से करोड़ों रुपये आ रहा है। एक तरह से यह युवा जिले में अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं।
जिले के लगभग तीन हजार लोग खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा युवक परास गांव के हैं। इस गांव के 400 लोग वहां हैं। सऊदीअरब के अलावा कुवैत, कतर, बहरीन, दुबई आदि देशों में भी लोग नौकरी कर रहे हैं। वहां से हर माह करोड़ों रुपये की रकम यह कामगार भेजते हैं। वहां रात-दिन मेहनत करने के बाद यह अपनी गाढ़ी कमाई परिजनों को देते हैं। वहां से आने वाली रकम से परिजन खाने-पीने के अलावा अन्य जरूरत की चीजें खरीदते हैं। इनकी कमाई का ही असर है कि जिले की छोटे-छोटे बाजारों ने आकर्षक रूप ले लिया है। कारोबार को नया रूप मिला है। कारोबार में प्रतियोगिता भी शुरू हो गई है। कारोबारियों का मानना है कि हर माह कम से कम 10 से 15 करोड़ रुपये खाड़ी देशों से कौशाम्बी आता है, जिसे परिजन खर्च करते हैं। यह रुपया बाजार में ही जाता है। यही कारण है कि बाजार की स्थिति ठीक हुई है। इन परदेसियों की वजह से कौशाम्बी का पिछड़ापन भी काफी हद तक दूर हुआ है। महंगी बाइकें, लग्जरी कारों से इनके परिजन फर्राटा भरते हैं। यह परदेसी अर्थव्यवस्था की मजबूत डोर साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि खाड़ी देशों में किसी भी प्रकार की घटना होने पर एक पूरा वर्ग चिंतित हो जाता है। उनकी आंखों की नींद उड़ जाती है। जब तक वे हकीकत से रूबरू नहीं हो जाते, उन्हें नहीं नहीं आती है।
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त्योहारों पर दिखता है जलवा
खाड़ी देशों में काम करने वाले परिजनों का जलवा त्योहारों पर दिखता है। कमाऊपूतों ने अपने परिजनों का हाव-भाव बदल दिया है। आलीशान बंगलों में इनके परिजन रहते हैं। कान्वेंट स्कूलों में बच्चे पढ़ते हैं। परिजनों पर वे मोटी रकम खर्च करते हैं। बेहतर शिक्षा मिलने का परिणाम यह रहा कि युवाओं की सामाजिक गतिविधि में भी इजाफा हुआ है। वे बढ़-चढ़कर समाज सेवा के कार्यों में भी भाग लेते हैं। इनके परिजनों की राजनीतिक दखलदांजी भी रहती है।