फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस: 27 साल से बंजर साबित हो रही दोआबा की धरती

विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेसियों को अब प्रियंका गांधी से करिश्मे की उम्मीद
विज्ञापन

1991 से हुए सात लोकसभा चुनावों में पांच बार जब्त हुई जमानत
मंझनपुर। दोआबा की सियासी धरती 27 सालों से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए बंजर साबित हो रही है। वर्ष 1991 से हुए सात चुनावों में छह बार पार्टी ने प्रत्याशी उतारा। इनमें से पांच चुनावों में पार्टी प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा सके। अब 17 वीं लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रियंका गांधी से करिश्मे की उम्मीद है।
किसी जमाने में दोआबा को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग माना जाता था। आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद ईस्ट कम जौनपुर वेस्ट संसदीय क्षेत्र का हिस्सा रही इस सीट से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने प्रचंड बहुमत के साथ चुनाव जीता था। 1957 में भी उनका जादू यहां के मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला था। इसके बाद फूलपुर और फिर चायल संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बने दोआबा में 1962 और 67 में पार्टी के ही मसुरियादीन विजयी हुए। पार्टी की जीत का ये सिलसिला 1971 तक जारी रहा। आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में कांग्रेस और इंदिरा विरोधी लहर में दोआबा के वोटर भी बदल गए। नतीजतन पार्टी प्रत्याशी जगदीश प्रसाद चुनाव हार गए, लेकिन नाराजगी ज्यादा दिन तक नहीं चली। 1980 के चुनाव में ही दोआबा के लोगों ने फिर से पार्टी प्रत्याशी को सिर माथे लगाया। 84 और 89 में भी यहां से कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीत गए। 77 को छोड़कर 89 के बीच खास बात यह देखने को मिली कि प्रत्याशी कोई भी हो दोआबा के वोटरों ने पार्टी के नाम पर आंख मूंदकर भरोसा किया, लेकिन इसके बाद 91 से अभेद्य दुर्ग ढहा तो फिर आज तक पार्टी का कोई भी नेता दीवार तक नहीं खड़ी कर सका। इस बीच पार्टी ने तमाम प्रयोग किए। चेहरे बदल-बदलकर मैदान में उतारने के बावजूद पार्टी को कोई फायदा नहीं मिला। अब 17 वीं लोकसभा चुनाव में विपक्ष सामने है। इन सबके बीच फिलहाल अभी तक पार्टी ने कौशाम्बी संसदीय सीट पर किसी उम्मीदवार का नाम तो नहीं फाइनल किया है,लेकिन दावेदारी की लाइन में लगे आठ नेताओं को प्रियंका गांधी के जरिए किसी बड़े करिश्मे की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंसेट
कांग्रेस के समर्थन पर भी जमानत नहीं बचा सकी थी लोजपा
मंझनपुर। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण वर्ष 2004 में पार्टी ने चायल संसदीय सीट सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी के लिए छोड़ दिया था। उस दौरान लोजपा ने पूर्व सांसद शशि प्रकाश को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में कांग्रेस का समर्थन मिलने के बावजूद शशि प्रकाश को सिर्फ 3.21 प्रतिशत ही वोट मिले थे। इसके चलते कांग्रेस समर्थित लोजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी।
---------------------------------------------------
कांग्रेस का लोकसभा चुनावों में अब तक के प्रदर्शन पर एक नजर-
---------------------------------------------------
वर्ष प्रत्याशी का नाम स्थान मिले वोट वोट प्रतिशत
1952 पं जवाहर लाल नेहरू प्रथम 233571 38.73
1957 पं जवाहर लाल नेहरू प्रथम 227448 36.87
1962 मसुरिया दीन प्रथम 67251 42.42
1967 मसुरियादीन प्रथम 85916 42.73
1971 छोटेलाल प्रथम 93661 60.18
1977 जगदीश प्रसाद द्वितीय 57291 22.88
1980 रामनिहोर राकेश प्रथम 91611 40.98
1984 बिहारीलाल शैलेश प्रथम 150306 47.05
1989 रामनिहोर राकेश प्रथम 155738 42.93
1991 रामनिहोर राकेश तृतीय 40611 11.44
1996 पुरुषोत्तमलाल चतुर्थ 9864 02.66
1998 रामनिहोर राकेश चतुर्थ 27897 05.08
1999 रामनिहोर राकेश तृतीय 95352 24.13
2009 रामनिहोर राकेश तृतीय 40765 07.39
2014 महेंद्र कुमार गौतम चतुर्थ 31904 03.49
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें