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राजा उदयन के सेनापति ने स्थापित कराया था झारखंडी धाम

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नवरात्र में झारखंडीधाम में उमड़ता है आस्था का सैलाब
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राजा उदयन के सेनापति ने स्थापित कराई थी देवी की प्रतिमा
स्वप्न में देवी ने दिया था दर्शन, मंदिर स्थापना के बाद सेनापति के हुई थी औलाद
फोटो नं-01
अमर उजाला ब्यूरो
पश्चिमशरीरा। पश्चिमशरीरा कस्बे की झारखंडी देवी का ऐतिहासिक महत्व है। वत्स देश (कौशाम्बी) के राजा उदयन के नि:संतान सेनापति ने झारखंड से देवी की प्रतिमा लाकर यहां स्थापित कराया था। तभी से यह स्थान झारखंडी धाम के नाम से विख्यात हुआ। धाम में वैसे तो रोजाना भक्तों का आना-जाना लगा रहता है लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों का मेला लगता है।
पश्चिमशरीरा स्थित झारखंडी धाम के बाबत किंवदंती है कि एक बार राजा उदयन की सेना यहां रुकी थी। रात को सेनापति को मां ने स्वप्न में दर्शन दिया। सेनापति के संतान नहीं थी। मां ने कहा कि झारखंड में हमारी बहनों की प्रतिमा हैं। वह यहां लाकर स्थापित कराएं तो संतान हो जाएगी। सेनापति ने ऐसा ही कि और उनके दो संतान प्राची और प्रतीची हुई। कहा जाता है प्राची के नाम से पश्चिमशरीरा और प्रतीची के नाम से पूरबशरीरा आबाद हुआ।
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पहले घना जंगल था इलाका
पश्चिम शरीरा। झारखंडी देवी का मंदिर जिस स्थान पर हैं वहां पहले घना जंगल हुआ करता था। देवी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह इलाका गुलजार हुआ। आज पश्चिम शरीरा और पूरब शरीरा प्रमुख बाजारों में गिने जाते हैं।
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देवी दर्शन के बाद नव वधू का होता है प्रवेश
पश्चिम शरीरा। इलाके के लोग कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले मां का दर्शन करने आते हैं। क्षेत्र में जिस व्यक्ति की शादी होती हैं वह सबसे पहले जीवन संगिनी के साथ देवी का दर्शन करता है। देवी का आशीर्वाद लेने के बाद ही वह लोग गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं।

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