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जन अधिकारों की अनदेखी कर रही कौशाम्बी पुलिस

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जन अधिकारों की दुश्मन बन रही कौशाम्बी पुलिस
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मंझनपुर। दोआबा की पुलिस जन अधिकारों की अनदेखी कर रही है। नाबालिगों और शिक्षक जैसे गरिमा वाले पद पर बैठे लोगों को अपमानित कर देना व उनके अधिकारों का हनन करना यहां दरोगा-सिपाहियों के लिए आम बात हो गई है। बड़ी बात है कि इन मामलों में आरोपी मातहतों के खिलाफ अफसर कार्रवाई भी नहीं करते हैं।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गृह जनपद होने के बाद कौशाम्बी पुलिस मनमानी कर रही है। फरियादियों को कोतवाली से डांटकर भगाए जाने की शिकायतें आम हो गई हैं। पीड़ितों की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए समझौते का दबाव बनाया जाता है। कई बार पीड़ित को ही सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। इन सबके साथ अब पुलिसकर्मी लोगों का अधिकार भी छीनने लगे हैं। उन्हें किसी का कोई डर ही नहीं है। अधिकारों के हनन के मामले करीब एक महीने से लगातार सुर्खियों में आ रहे हैं।
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सरसवां ब्लॉक के लोधौर प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक लालमणि को चार सितंबर को करारी पुलिस ने लड़की भगाने के एक पुराने मामले में पकड़ा था। आरोप है कि शिक्षक को उनके घर से कोतवाली तक अंडरवियर में ले जाया गया। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। आरोपी दरोगा-सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षक संघ दो बार एसपी को ज्ञापन दे चुका है। इसके बाद भी अब तक किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं एसओजी ने 10 अगस्त को बाइक चोरों का एक गिरोह पकड़ा था। इसमें एक नाबालिग भी शामिल था। नगर कोतवाली पुलिस ने नाबालिग होने की जानकारी होने के बाद भी उसे लॉकअप में डाल दिया। पुलिस की लापरवाही का यह प्रकरण सुर्खियों में आया। ट्विटर पर डीजीपी तक से शिकायत हुई। आईजी ने कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया गया। कार्रवाई न होने का नतीजा है कि पुलिस नियमों की धज्जियां उड़ा रही है।
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पड़ोस के एक बालक की पिटाई करने के आरोप में फंसे कक्षा आठ के तीन छात्रों को गुरुवार सुबह मंझनपुर कोतवाली पुलिस ने पकड़ा। बच्चों को वर्दी में उनके घर से उठाया गया। पुलिस वाले वर्दी में ही बच्चों को कोतवाली से लेकर एसपी ऑफिस तक गए। उन्हें सरकारी जीप से लाया और ले जाया गया। वर्दी में ही पूछताछ भी की गई। बाल अधिकारों का हनन किए जाने के इस मामले में एसपी कह रहे हैं कि वर्दी में आरोपी बच्चे को गिरफ्तार किया जाना गलत नहीं है। मामूली बातों में कैंडल लेकर सड़क पर आने वाले सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी भी तमाशबीन बनकर पुलिस की मनमानी देख रहे हैं। कोई अब न सड़क पर आने को तैयार है और न कुछ बोलने को। बतादें कि यह वही कौशाम्बी जिला है, जहां के समाजसेवी अक्सर जनहित याचिका लेकर अदालत में खड़े रहते हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता परवेज का कहना है कि अधिकारों का हनन करने के मामलों में आरोपी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अफसर ऐसा नहीं करने तो यह बहुत ही गलत बात है। गंभीर प्रकरणों को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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