मंझनपुर (कौशाम्बी)। विकास कार्यों की समीक्षा करने मंगलवार को अंबावां पूरब गईं उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को प्रधान-सेक्रेटरी ने दलित होने की वजह से बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया। एक बीडीसी ने तो यहां तक कह दिया कि बर्तन अशुद्ध हो जाएगा। प्यास की वजह से महिला अफसर की तबीयत बिगड़ गई। पीड़ित अधिकारी ने मामले की शिकायत डीएम, सदर विधायक सहित कई अफसरों से की है।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा ने बताया कि डीपीआरओ के निर्देश पर मंगलवार को वह विकास कार्यों की समीक्षा करने सदर ब्लॉक के अंबावां पूरब गांव गई थीं। वहां उनकी बॉटल का पानी खत्म हो गया। इस पर उन्होंने ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान से पानी मांगा। दोनों ने दलित होने की वजह से बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया। अफसर के मुताबिक मौजूद ग्रामीणों से पानी मांगा तो प्रधान-सेक्रेटरी ने उन्हें भी इशारा करके मना कर दिया। एक क्षेत्र पंचायत सदस्य ने साफ कह दिया कि बर्तन में पानी देने से बर्तन अशुद्ध हो जाएगा। अफसर का कहना है कि वह शुगर की मरीज हैं। करीब दो घंटे तक पानी नहीं मिलने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। हाथ-पैर कांपने लगे। स्वास्थ्य खराब होता देख वह जल्दी-जल्दी समीक्षा कर ऑफिस लौट गईं। पीड़ित महिला अफसर ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मंझनपुर विधायक लाल बहादुर व डीपीआरओ कमल किशोर से कर दी है।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा का कहना है कि डीपीआरओ के निर्देश पर मैं विकास कार्यों की समीक्षा करने अंबावां पूरब गई थी। वहां दलित होने की वजह से प्रधान-सेक्रेटरी ने मुझे बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया। एक बीडीसी ने बर्तन अशुद्ध होने की बात कहकर अपमानित भी किया। डीएम का कहना है कि महिला अफसर की शिकायत अभी मुझे नहीं मिली है। हो सकता है कि उन्होंने इसकी लिखित शिकायत की हो, शिकायत प्राप्त होने पर मामले की जांच कराई जाएगी।