पीएम मोदी के ऐलान के बाद आधी रात से बंद हुई पांच सौ व एक हजार रुपये की नोट को लेकर बुधवार को दिन भर बाजारों में हड़कंप रहा। फुटकर की ऐसी किल्लत बाजारों में रही। पैसे वालों को किराना का सामान लेने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। मजबूरन उन्हें उधार में सामान लेना पड़ा। पेट्रोल पंपों में लोगों की लंबी लाइनें लगी रहीं।
बुधवार को गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक पांच सौ व एक हजार रुपया की नोट बंद होने की जानकारी होते ही लोग परेशान हो गए। जिनके पास पांच सौ व एक हजार की नोट था, वह उसे भुनाने के प्रयास में जुट गए। किसान से लेकर रसूखदार तक इसको लेकर परेशान रहे। कोई पेट्रोल भरवाने की फिराक में था तो कोई लिए गए उधार को इसी बहाने चुकता करने की कोशिश में जुटा रहा। इस खेल में बहुत से लोग कामयाब भी हो गए।
बाद में जिनको पता चला तो वह इसको लेकर नाराज भी दिखे। मंझनपुर, भरवारी, सिराथू, सरायअकिल, अझुवा, पश्चिमशरीरा, मनौरी आदि बाजारों की सुबह से लेकर शाम तक यही स्थिति रही। तमाम ऐसे लोग दिखे जिन्हें पान, गुटखा उधार में खाना पड़ा। उनकी यह स्थिति तब थी, जब उनके जेब में मोटी रकम थी। इसके बाद भी वह कंगालों की भूमिका में रहे। बुधवार को बैंक बंद था, इसलिए वह अपना रुपया भी नहीं जमा कर पाए।
सरकार के फैसले से गृह लक्ष्मी रहीं लाल-पीली
पांच सौ व एक हजार की नोट बंद होने से सबसे ज्यादा गुस्से में महिलाएं दिखीं। गुल्लक व बचाकर रखे गए रुपये उन्होंने निकाले तो परिजन भी दंग रह गए। किसी के घर से दस हजार निकला तो, किसी के घर से पांच हजार। क्या किसान, क्या सेठ? सबके घरों की यही स्थिति रही। घरों से बड़ी नोट निकली तो वह उसको भुनाने को लेकर चिंतित दिखे। कंथुआ के रणविजय निषाद प्राइमरी विद्यालय में शिक्षक हैं। मंगलवार की रात वह टीवी देख रहे थे। पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट बंद होने का पता चलते ही सबसे पहले उन्होंने अपना पर्स देखा। पांच सौ के सात नोट थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता से बातचीत की। पहले तो पत्नी ने आनाकानी की, जब हकीकत बताई तो उन्होंने 35 हजार निकाल के दिए।
पता चला कि उन्होंने काफी दिनों से यह रकम इकट्ठा कर रखी है। इतनी रकम हाथ में देख शिक्षक रणविजय निषाद के होश उड़ गए। वह दिन भर इस रकम को भुनाने के प्रयास में थे, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। रणविजय का कहना है कि अब वह बैंक खुलने पर इसे अपने खाते में डालेंगे। रणविजय निषाद की यह समस्या अकेले की नहीं रही। रणविजय जैसे तमाम मध्यमवर्गीय परिवार के लोग रहें, जिनके घरों में इस तरह की रकम बचत के जरिए थी। अब वही उनके गले की फांस बना हुआ है। शिक्षक, लेखपाल, पंचायत सचिव, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, कलेक्ट्रेट कर्मी आदि की यही स्थिति रही।
फंसे पंचायत सचिव, कहां ले जाएं 60 लाख
जिला मुख्यालय में रहने वाले एक पंचायत सचिव ने मंगलवार को अपनी पत्नी के नाम से करीब 80 लाख रुपये की भूमि बेची थी। बिक्री में उन्होंने खेल किया। जमीन की कीमत लगभग 20 लाख रुपये अभिलेखों में दर्ज है, जबकि उन्होंने क्रेता से 80 लाख लिए हैं। अब उनके सामने संकट है कि वह इस रकम का क्या करें। अपने अथवा पत्नी के खाते में रकम डालते हैं तो इसका जवाब भी उन्हें देना पड़ेगा। इसको लेकर वह दिन भर हलाकान रहे और परिचितों से मदद मांगते रहे।
मंझनपुर व सरायअकिल में बंद रही बाजारें
पांच सौ व एक हजार की नोट बंद होने के कारण फुटकर की किल्लत होनी तय थी। इसकी संभावना को देखते हुए सरायअकिल व मंझनपुर की बाजारें बंद रही। मंझनपुर के कारोबारियों ने बुधवार बंदी का भी इसी बहाने लाभ उठाया। कोई भी सामान लेने पहुंचता तो साफ कह दिया जाता था कि आज बंदी है। सरायअकिल में बुधवार को बंदी नहीं थी, लेकिन दुकानें बंद रहीं। यही हाल करारी का भी रहा।
सपाइयों ने किया विरोध
पीएम मोदी के फैसले का सपाइयों ने विरोध किया है। बुधवार को पार्टी कार्यालय में लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष इजहार अहमद की अगुवाई में कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। इजहार अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह फैसला गलत है। तानाशाही रवैया प्रधानमंत्री ने दिखाया है। इस मौके पर तलवार सिंह यादव, तारा सिंह, नथन लाल, शिवपाल यादव, रामभवन, दिनईलाल, रामऔतार चौधरी, सुरसती यादव आदि लोग रहे।
पेट्रोल पंप पर मिलता रहेगा ईंधन
इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड इलाहाबाद मंडल के कौशांबी जिले के सेल्स आफिसर विजय कुलहर ने पांच सौ व एक हजार की नोट बंद होने पर भी ग्राहकों को गुरुवार व शुक्रवार तक पेट्रोल देने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप पर आने वाले ग्राहक यदि पांच सौ व एक हजार रुपये की नोट देकर पेट्रोल अथवा डीजल की मांग करते हैं तो उन्हें ईंधन दिया जाए।