मंझनपुर/चायल। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर खोले गए खाते अब बैंकों के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जनपद में महज 90 हजार उपभोक्ता ही इन खातों का उपयोग पैसा निकालने व जमा करने के लिए कर रहे हैं। जबकि शेष बचे 1.85 लाख उपभोक्ता पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। जागरुकता के तमाम प्रयास के बावजूद इन उपभोक्ताओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। नतीजतन बैंकों ने इन खातों को खराब मानते हुए बंद कर दिया है।
समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बैंकों से जोड़ने के लिए पांच साल पहले 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनधन योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत विभिन्न बैंकों में हर आय-वर्ग के परिवारों के खाते जीरो बैलेंस पर खुलवाकर एटीएम सहित सभी प्रकार की उपयोगी सामग्री प्रदान की गई थी। 31 मार्च 2019 तक जिले भर में लगभग 2.75 लाख खाते खोले जा चुके थे। मार्च 2019 तक छह महीने के दौरान जिन उपभोक्ताओं के खातों में लेनदेन नहीं हुआ था। उन खातों को बैंक ने बंद कर दिया है। इस समय कौशाम्बी जनपद में लगभग 65 प्रतिशत जनधन खाते निष्क्त्रिस्य हैं। हर तीसरे साल जन-धन खातों की समीक्षा होती रहती है।
इस दौरान जिन खातों में लेनदेन नहीं होगा। उस खाते को बंद कर दिया जाएगा। सभी खाता धारकों से खातों में कुछ न कुछ राशि जमा कर बैंक से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने का प्रयास किया गया था। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में स्थित कियोस्क संचालकों की मदद ली जा रही थी। जबकि शहरी इलाकों में स्थित बैंकों में बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही उपभोक्ताओं के बीच पहुंचकर बैंकों की योजनाओं व पैसों की बचत से होने वाले लाभों के बारे में ये भी बताया गया था। पर, उपभोक्ताओं को जागरूक करने का प्रयास सफल नहीं हो सका। अधिकांश परिवारों की बेहतर आय नहीं होने से वह नियमित रुप से खातों में पैसा नहीं जमा कर पा रहे हैं। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं जिन्होंने एक बार खाता खोलने के ही समय बैंक का मुंह देखा है। खाता खोलने के बाद दोबारा बैंक जाने की जरूरत ही नहीं समझी।