फोटो 42 मोहनपुरा में धान की थ्रेसिंग करते किसान्। संवाद
कासगंज। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती प्रभाव के चलते मौसम के मिजाज में अचानक आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग द्वारा 29 से 31 अक्तूबर के बीच तेज हवाएं चलने और बौछारें पड़ने की संभावना जताए जाने के बाद, किसान अपनी पकी फसलों को सुरक्षित समेटने की जद्दोजहद में जुट गए हैं।
बुधवार को आसमान में बादलों की आवाजाही से मौसम बदला नजर आया। हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश की मार झेल चुके किसानों के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। क्षेत्र के रामपुर, कांतौर और मोहनपुरा समेत आसपास के गांवों में किसान आसमान के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खेतों में अभी भी कहीं बाजरा की पकी फसल खड़ी है, तो कहीं मटर के बीज अंकुरित हो रहे हैं।
रामपुर के किसान रिंकू ने बताया कि उनके खेत में बाजरा की फसल तैयार है जिसे वे एक-दो दिन में काटने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, किसान राजेंद्र कुमार के अनुसार, यदि बारिश होती है तो मटर के अंकुरित पौधों और सरसों की नई बुवाई पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
किसानों को डर है कि यदि मौसम ने करवट ली, तो उनकी महीनों की मेहनत और पूंजी पर पानी फिर सकता है। इसी आशंका पर किसान जल्द से जल्द अपनी उपज को सुरक्षित करने में लगे हैं।
वर्जन
मौसम विभाग से मिली सूचना के अनुसार बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती प्रभाव के कारण 29 से 31 अक्टूबर तक तेज हवाएं चलने और बौछारें पड़ने की संभावना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम का रुख देखकर सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं।-महेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक