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Kasganj News: रास्ते की आस में वाल्मीकि समाज, खेत से होकर ले जानी पड़ी अर्थी

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फोटो 54 बिलराम में खेत से होकर शव को ले जाते लोग। संवाद
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ढोलना। कस्बा बिलराम में श्मशान स्थल तक जाने के लिए रास्ता न होने से वाल्मीकि समाज के लोगों को वर्षों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत और अधिकारियों की ओर से पैमाइश किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्मशान स्थल का जीर्णोद्धार भी नहीं कराया गया है। इससे समाज के लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
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कस्बे के मोहल्ला कस्सावान सहित अन्य मोहल्लों में रहने वाले वाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है कि श्मशान तक पहुंचने के लिए कोई उचित रास्ता नहीं है। किसी की मृत्यु होने पर परिजनों और समाज के लोगों को खेतों से होकर शव ले जाना पड़ता है। इससे खेत मालिकों के साथ विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
लोगों का आरोप है कि वर्षों से रास्ता बनवाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मंगलवार को मोहल्ला कस्सावान निवासी निर्मल पुत्र फूल सिंह की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए अर्थी को आलू की बुवाई वाले खेत से होकर ले जाना पड़ा। इस स्थिति से नाराज समाज के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया और श्मशान तक रास्ता बनवाने की मांग की।
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समाज के लोगों ने चेतावनी दी कि यदि अगली मृत्यु तक रास्ते की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे शव को रास्ते में रखकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। प्रदर्शन करने वालों में शिशुपाल वाल्मीकि, विजय वाल्मीकि, फूल सिंह वाल्मीकि, श्रीनिवास, राकेश, छोटेलाल, विनोद, रामबाबू और ज्ञानचंद्र सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
वर्जन :
-शमशान भूमि तक जाने के लिए खेत के स्वामी में रास्ते के लिए जगह दे दी है। शमशान भूमि के निर्माण के दौरान सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इससे लोगों को शव शमशान भूमि तक लेकर जाने में परेशानी नहीं हो गी। -सुनीता ,अध्यक्ष नगर पंचायत बिलराम ।
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