कासगंज। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के कारण महिलाओं में थायराइड एक कॉमन बीमारी हो गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायराइड होने की संभावना लगभग 8 से 10 गुना अधिक होती है। हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली यह बीमारी यदि समय पर न पकड़ी जाए तो यह शरीर के अन्य अंगों पर भी बुरा प्रभाव डालती है।
जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नबीला अब्बासी ने बताया कि थायराइड गले में सामने की ओर स्थित एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो तितली के आकार की होती है। यह थायरोक्सिन हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। जब यह हार्मोन कम या ज्यादा बनने लगता है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि थायराइड दो प्रकार का होता है। पहला हाइपोथायरायडिज्म, इसमें वजन तेजी से बढ़ने लगता है। त्वचा सूखी सी हो जाती है और कमजोरी सी लगती है। जबकि दूसरे हाइपरथायरायडिज्म में वजन तेजी से घटने लगता है। इसमें त्वचा चमकीली हो जाती है।
डॉक्टर के मुताबिक, महिलाओं में थायराइड का मुख्य कारण आयोडीन की कमी, अत्यधिक तनाव, आनुवंशिकता और गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। हालांकि, सही समय पर जांच, सही खान-पान और नियमित दवा के सेवन से इस बीमारी को आसानी से हराया जा सकता है।
बीमारी के लक्षण
-अचानक वजन बढ़ना या कम होना
-हर समय थकान और कमजोरी
-किसी भी काम में मन न लगना
-मासिक धर्म में अनियमितता
-बालों का झड़ना और सूखी त्वचा
-घबराहट और चिड़चिड़ापन
-गर्दन में सूजन महसूस होना
बचाव के तरीके
-आयोडीन और हरी सब्जी युक्त भोजन करें
-तनाव कम करने के लिए योग-ध्यान करें
-प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें
-हार्मोन संतुलन के लिए 7-8 घंटे की नींद लें
-डॉक्टर से परामर्श लेकर नियमित दवा लेते रहे