फोटो20सोरोंजी के वराह मंदिर में भगवान वराह का अभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद
कासगंज। नए साल का पहला दिन भक्ति और धार्मिक उत्साह के रंग में रंगा नजर आया। शहर के प्रमुख मंदिरों, चर्चों और गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पूजा, प्रार्थना और अरदास के माध्यम से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते नजर आए।सुबह की ठंडी हवा के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और उमंग देखने लायक था। परिवार और मित्रों के साथ आए लोग नए साल की शुरुआत भक्ति के साथ करने के लिए बड़े उत्साह से मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे थे। इस अवसर पर मंदिरों में घंटियों की मधुर ध्वनि और भजन-कीर्तन का क्रम माहौल को भक्ति से सराबोर कर रहा था।माता चामुंडा मंदिर पर विशेष भीड़ देखी गई। इसके अलावा शहर के गली-मोहल्लों में स्थित छोटे-छोटे मंदिरों में भी लोग नियमित पूजा और अर्चना में शामिल हुए।शहर के चर्चों और गुरुद्वारों में भी धार्मिक उत्साह का आलम देखने को मिला। चर्चों में गिरिजाघरों की घंटियों के साथ प्रार्थनाओं का क्रम चलता रहा, जबकि गुरुद्वारों में सिख समाज के लोगों माथा टेककर अरदास और कीर्तन में भाग ले रहे थे। भक्ति और उत्साह के इस रंगीन माहौल ने लोगों को सकारात्मक ऊर्जा और उमंग के साथ नए साल की यादगार शुरुआत का अनुभव कराया। वहीं, धर्मनगरी सोरोंजी में लोगों ने परिवार के साथ मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन करने में मनाया। क्षेत्राधीश वराह मंदिर में आयोजित अभिषेक पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सुबह भगवान वराह की मंगला आरती के बाद भगवान का गंगाजल, दूध, दही, घृत, शहद से पंचाभिषेक किया गया। आचार्य पंडित नरेश त्रिगुणायत ने वैदिक मंत्र उच्चारित करते हुए विधिविधान पूर्वक अभिषेक कराया। अभिषेक के बाद भगवान का नूतन वस्त्र अलंकार से भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को मेवा मिष्ठान का भोग लगाया गया। शंख और घंटे की गूंज के बीच भी भगवान वराह की महाआरती उतारी गई। शाम के समय भजन कीर्तन के माध्यम से मां गंगा व भगवान वराह का गुणगान किया गया। वहीं तीर्थनगरी के सोमेश्वर महादेव, बालाजी दरबार, द्वारिकाधीश, बटुकनाथ, सूर्यकुंड, सीतारामजी मंदिर, भागीरथी गुफा, भूतेश्वर, सिद्ध हनुमान, पंच महाशक्ति, योगेश्वर आदि मंदिरों में भी पहुंचकर श्रद्धालुओं ने सपरिवार पूजन कर अपने परिवार में सुख समृद्धि की कामना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी की परिक्रमा की।