कासगंज। गर्मी की दस्तक के साथ ही फलों के राजा आम की सुगंध बाजारों में फैलने लगी है। जिले में आम की शुरुआती आवक शुरू हो गई है, जिससे फलों के शौकीनों के चेहरे खिल उठे हैं। फिलहाल, बाजार में मुख्य रूप से मद्रास से आने वाला आम उपलब्ध है, जिसकी कीमतें 50 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रही हैं। हालांकि, इस बार स्थानीय आम के उत्पादन पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है।
जिले में लगभग 1715 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी की जाती है। पिछले वर्ष जहां लगभग 2.50 लाख क्विंटल आम का उत्पादन हुआ था, वहीं इस वर्ष मौसम के उतार-चढ़ाव ने पैदावार को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थिति यह है कि बाजार में पका आम तो दूर, कच्चे आम की आवक भी सामान्य से काफी कम है।
आम बागवानों के अनुसार, इस साल मौसम का असर पैदावार पर पड़ा है। बौर (आम के फूल) काफी कम आए और आंधी-तूफान से फसल को भी नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि स्थानीय पका आम बाजार में आने में अभी और समय लगेगा।
फल व्यापारियों के अनुसार, इस समय बाजार की मांग मुख्य रूप से दक्षिण भारत के मद्रास क्षेत्र से आने वाले आम से पूरी हो रही है। यह शुरुआती सीजन का आम है, इसलिए इसकी उपलब्धता सीमित है और कीमत भी अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है।
इस समय बाजार में सफेदा, सिंदूरी और तोताफरी जैसी किस्मों के आम की आवक हो रही है। व्यापारी ने बताया कि शुरुआती दौर में इन किस्मों की गुणवत्ता और आपूर्ति सीमित होने के कारण दामों में अंतर देखने को मिल रहा है।
तोतापुरी 50, सिंदूरी और सफेद 100 रुपये किलो
बाजार में आम की कीमत किस्म और गुणवत्ता के आधार पर तय हो रही है। तोताफरी आम 50 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है, जबकि बेहतर गुणवत्ता वाले सफेदा और सिंदूरी आम की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है।
आम बागवान सुरेश ने बताया कि इस साल मौसम का असर पैदावार पर पड़ा है। काफी कम बौर आया है और आंधी से फसल को नुकसान भी हुआ है। अभी स्थानीय पका आम आने में समय लगेगा। व्यापारी अनवार ने कहा कि इस समय मद्रास का आम ही बाजार में आ रहा है। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 क्विंटल आम की मंडी में आवक हो रही है।