तीर्थनगरी में हरि की पौड़ी किनारे अपने पितरों की आत्म शांति के लिए जल दान करते श्रद्धालु।संवाद
सोरोंजी। पितृपक्ष में तीर्थनगरी में अपने पितरों को मोक्ष की कामना के लिए देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु हरि की पौड़ी पहुंच रहे हैं। भगवान वराह की निर्वाण स्थली शूकरक्षेत्र में पिंडदान व श्राद्ध पूजा करने से प्राणी को जल थल नभ से मुक्ति मिल जाती है। इसी पौराणिक मान्यता के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु तीर्थपुरोहितों से अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध पूजा करा रहे हैं।
पितरों को जलदान करने के बाद श्रद्धालु तीर्थपुरोहितों को भोजन कराने के बाद दान दक्षिणा दे रहे हैं। क्षेत्राधीश भगवान वराह के दर्शन के बिना शूकरक्षेत्र की यात्रा पूरी नहीं होती। इस बात को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालु भगवान वराह के दरबार मे मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। शूकरक्षेत्र के बालाजी मंदिर वाले घाट पर विद्वान आचार्य पंडित शशिधर द्विवेदी व वराह घाट पर आचार्य पंडित धर्मधर शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालु विधिविधान पूर्वक पितरों को जल तर्पण कर रहे हैं।
आचार्य सक्षम द्विवेदी ने बताया कि यह क्षेत्र पृथ्वी का आदि क्षेत्र है। यह वराह गंगा वृहद गंगा और भागीरथी गंगा के पवित्र अंचल में स्थित है इस तीर्थस्थल को देखने यहां की रज को स्पर्श करने और दान आदि से पितर ही नहीं व्यक्ति स्वयं भी मोक्ष का अधिकारी हो जाता है। भगवान वराह का यह अतिप्रिय क्षेत्र है इसी के चलते यहां उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया श्राद्ध कर्म के लिए शूकरक्षेत्र सर्वोत्तम है।