कासगंज। उत्तर प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के साथ संस्कृत शिक्षा परिषद ने नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया है। इस बार पाठ्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य शिक्षा को अधिक रोचक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाना है। 1 अप्रैल से लागू हुए इन बदलावों में विद्यार्थियों को बाल राम कथा और बाल महाभारत कथा पढ़ाई जाएगी।
सबसे अहम बदलाव हिंदी विषय के पाठ्यक्रम से संस्कृत अंश को पूरी तरह हटाना है। इससे हिंदी प्रश्नपत्रों में संस्कृत भाषा से संबंधित कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा, जिससे विषयों की स्पष्टता बढ़ेगी। कक्षा 6 के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की बाल राम कथा को सहायक पुस्तक के रूप में जोड़ा गया है। यह रामायण की कथाओं के माध्यम से बच्चों में नैतिक मूल्यों और आदर्शों का विकास करेगी। वहीं, कक्षा 7 में बाल महाभारत कथा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उच्च कक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी साहित्यिक विस्तार किया गया है। संस्कृत विद्यालय नगला कटीला के प्रधानाचार्य लोकेंद्र देव आर्य ने बताया कि पाठ्यक्रम में कई बदलाव किए गए हैं।
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कक्षा 9 से 12 तक साहित्य और देशभक्ति का संगम
कक्षा 9 में उपेंद्र नाथ अश्क का एकांकी 'लक्ष्मी का स्वागत' शामिल किया गया है, जो सामाजिक यथार्थ को दर्शाता है। कक्षा 10 के छात्रों को 'मातृ भूमि के लिए' पढ़ाया जाएगा, जिससे देशभक्ति की भावना प्रबल होगी। कक्षा 11 में व्यथित की रचना 'राज मुकुट' को जोड़ा गया है। कक्षा 12 में खंड काव्य के अंतर्गत शिव बालक शुक्ल की 'श्रवण कुमार' पढ़ाई जाएगी। ये सभी रचनाएं छात्रों के नैतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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न्यूज पेपर भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
जिले के आठ संस्कृत विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान प्रमुख समाचार पत्र पढ़वाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह बदलाव छात्रों को डिजिटल स्क्रीन से दूर रखकर साहित्य और समसामयिक ज्ञान दोनों की ओर प्रोत्साहित करेगा। यह प्रयास पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध बना रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करना है।