कासगंज। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पुरुषोत्तम मास रविवार से शुरू होने जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह पावन मास 15 जून तक रहेगा। इस बार अधिक मास में हंस महापुरुष, गजलक्ष्मी और लक्ष्मी नारायण जैसे कई शुभ राजयोग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ज्योतिषाचार्य पं. भरत राम गौड़ के अनुसार हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यदायी और शुभ माना गया है। लगभग हर तीन वर्ष में आने वाला यह विशेष महीना भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। अधिक मास का संबंध हिंदू पंचांग की गणना पद्धति से है। हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। एक सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का माना जाता है। दोनों के बीच हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। यही अंतर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले अधिक मास को मल मास कहा जाता था और इसे शुभ नहीं माना जाता था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम देते हुए कहा कि संसार मुझे पुरुषोत्तम कहता है, इसलिए आज से यह मास भी पुरुषोत्तम मास कहलाएगा। तभी से इस मास का महत्व अत्यधिक बढ़ गया और इसमें किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माना जाने लगा।
इस वर्ष अधिक मास के दौरान हंस महापुरुष राजयोग, गजलक्ष्मी राजयोग, रूचक राजयोग, लक्ष्मी नारायण योग और भद्र राजयोग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में किए गए धार्मिक कार्य और साधना विशेष फल प्रदान कर सकते हैं।
अधिक मास में करें ये शुभ कार्य
दान और सेवा के कार्य करें
मंदिर,घर में तुलसी या बेलपत्र के पास दीपक जलाएं
श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता, शिवपुराण, गणेश पुराण सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ एवं श्रवण करें
अधिक मास में क्या नहीं करें
अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यापार, संपत्ति खरीदना शुभ नहीं माना जाता
मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैेसे तामसिक भोजन न करें
झूठ, क्रोध, अपशब्द और दूसरों का अपमान करने से बचें