कासगंज के लालपुर गांव से पांच महीने पहले लापता चार वर्षीय बच्चे को अनाथ बताकर चार लाख रुपये में बेचा गया था। रिश्ते में मामी लगने वाली महिला ने तीन लोगों के साथ मिलकर बच्चे को अगवा किया था। पुलिस ने बालक चंदन को तेलंगाना से सकुशल बरामद कर सोमवार को उसे परिजन को सौंप दिया। चारों अपहरणकर्ता अन्य आपराधिक मामलों में पहले से ही जेल में बंद हैं।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने अपहरण कांड का खुलासा करते हुए बताया कि 5 मार्च को लालपुर निवासी आशा देवी ने कासगंज कोतवाली में अपने रिश्ते के भांजे चंदन (4) पुत्र धर्मेंद्र के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। चंदन जिला शाहजहांपुर के थाना परौर क्षेत्र के गांव तिलकापुर से 15 दिन पहले अपनी नानी के घर रहने आया था। पिता धर्मेंद्र और मां ईशू देवी उसे नानी के घर छोड़कर गए थे। इस बीच 2 मार्च को नानी के घर के पास रेलवे लाइन के पास खेलते समय उसका अपहरण कर लिया गया था।
चंदन को तलाशने के लिए एसपी ने कोतवाली पुलिस और सर्विलांस सेल की एक संयुक्त टीम का गठन किया। पांच महीने के अथक प्रयास के बाद टीम ने चंदन को तेलंगाना के कुमायागुंड गांव, थाना तालिया से सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस जांच में पता चला कि आशा देवी का दामाद मोनू पाठक, उसकी बेटी नेहा पाठक और एक अन्य व्यक्ति राघवेंद्र हाथरस जंक्शन पर बच्चा चोरी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार होने के बाद मई से अलीगढ़ जेल में बंद हैं। वहीं, आशा देवी भी कुछ माह से गांजा तस्करी के एक मामले में विशाखापत्तनम जेल में बंद है।
पुलिस ने जब इन चारों आरोपियों से पूछताछ की तो उन्होंने चंदन के अपहरण की योजना बनाने और उसे 4 लाख रुपये में तेलंगाना के त्रिमलेश को बेचने की बात कबूल की। पुलिस ने त्रिमलेश के घर दबिश देकर चंदन को बरामद कर लिया। त्रिमलेश की पत्नी ममता ने बताया कि उनके पति की 25 जून को पेड़ से गिरकर मौत हो चुकी है।
पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम
एसपी ने चंदन को सकुशल बरामद करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। टीम में कोतवाली प्रभारी प्रवेश राणा, प्रभारी सर्विलांस प्रेमपाल सिंह, उप निरीक्षक शिवनन्दन, और कांस्टेबल कायम सिंह शामिल हैं।