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UP: भंडारे का बचा प्रसाद बन गया जहर, गांव के 300 से ज्यादा लोग बीमार; इलाज में जुटी स्वास्थ्य विभाग की टीम

Tue, 09 Sep 2025 02:41 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में भंडारे का प्रसाद जहर बन गया। इसे खाने से 300 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। जानकारी मिलती है स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। बीमार लोगों का उपचार किया जा रहा है।  
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फूड प्वाइजनिंग से 300 से ज्यादा लोग बीमार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कासगंज के सिढ़पुरा थाना क्षेत्र के गांव कायमपुर में फूड प्वाइजनिंग से 300 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। भंडारे का बचा हुआ खाना खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ गई। बीमारों को जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंजडुंडवारा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिढ़पुरा और निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव पहुंच गई है। गांव में भी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। 
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ग्रामीणाें ने बताया कि गांव कायमपुर के हनुमान मंदिर पर चंदा करके कथा का आयोजन कराया गया। कथा के समापन पर रविवार को भंडारा हुआ। भंडारे में गांव लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। सोमवार को भी भंडारे का बचा हुआ खाना ग्रामीणों ने बांट गया। इसे खाने के बाद गांव में लोगों की तबीयत खराब होनी शुरू हो गई। लोगों को उल्टी, दस्त और पेट में दर्द होने लगा। सोमवार रात को लोगों की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंजडुंडवारा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिढ़पुरा और निजी चिकित्सक के यहां उन्हें भर्ती कराया गया। गांव में फूड प्वाइजनिंग की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई।

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स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मंगलवार की सुबह से गांव में डेरा डाल दिया। मरीजों की जांच कर उनका उपचार किया जा रहा है। जिन मरीजों की हालत गंभीर है। उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। आलम यह है कि जिला अस्पताल से लेकर निजी चिकित्सक के यहां मरीजों को भर्ती कराया गया है। फूड प्वाइजनिंग से 300 से ज्यादा लोगों के बीमार पड़ने की बात कही जा रही है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों का आंकड़ा जुटाने में लगा हुआ है। वहीं, फूड प्वाइजनिंग की सूचना पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भी गांव पहुंच गई है। 

 
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गांव में चारपाई पर हो रहा इलाज
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शायद ही ऐसा कोई घर बचा हो, जिसमें फूड प्वाइजनिंग से कोई बीमार न पड़ा हो। गांव की स्थिति यह है कि हर ओर चारपाई पर मरीज ही मरीज नजर आ रहे हैं। चारपाई पर ही उनका उपचार किया जा रहा है।
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