कासगंज में बस स्टैंड से डेढ़ माह के मासूम के गायब होने के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में बच्चे को दो लाख रुपये में बेचने का मामला सामने आया। पुलिस ने मासूम की मां, डॉक्टर दंपती और एक अन्य दंपती समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर बच्चे को सकुशल बरामद किया। आरोपियों के बताए गए ठिकानों से खरीद-फरोख्त से संबंधित 80 हजार रुपये भी बरामद किए गए हैं।
सोरोंजी क्षेत्र के गांव बनूपुर पुख्ता निवासी अरविंद फरीदाबाद में सोनपपड़ी बनाने वाली कंपनी में काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि 16 अक्तूबर को उसकी पत्नी डेढ़ माह के बेटे को दवा दिलाने कासगंज आई थी। बस स्टैंड पर उसने बच्चे को एक अज्ञात महिला के पास छोड़ा और लघुशंका के लिए चली गई। लौटने पर महिला और बच्चा दोनों गायब मिले। अरविंद ने 17 अक्तूबर को सोरोंजी थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच के दौरान बच्चे को बेचने की साजिश का पता चला।
पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह के निर्देश पर सीओ सदर आंचल चौहान के नेतृत्व में सोरोंजी पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार, 17 अक्तूबर को चंदपुरा-गऊपुरा कट के पास यात्री प्रतीक्षालय से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बच्चे की मां, सोरोंजी के गांव सलेमपुर उर्फ नगला भूतल निवासी डॉक्टर अरुण कुमार और उनकी पत्नी और जिला हाथरस में कोतवाली सिकंदराराऊ के गांव बारासरी निवासी महिपाल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया । आरोपियों की निशानदेही पर मासूम तलाश कर लिया।
पुलिस के मुताबिक बच्चे की मां ने 1.30 लाख रुपये मिलने और उसमें से 1.20 लाख रुपये बैंक खाते में जमा करने की बात बताई। डॉक्टर दंपती ने सौदे में दो लाख रुपये मिलने की जानकारी पुलिस को दी। शेष रकम में से 80 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। पुलिस ने मां के खाते में जमा धनराशि की निकासी पर रोक लगवा दी है।
पति ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
कासगंज के सोरोंजी क्षेत्र के रहने वाले युवक ने अपने 45 दिन के नवजात को बेचने के आरोप में अपनी पत्नी सहित पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। बच्चे के पिता ने पत्नी के साथ सोरोंजी में क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर और उनकी पत्नी पर भी बच्चे को बेचने में शामिल होने का आरोप लगाया। गांव बनुपुर पुख्ता निवासी अरविंद की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार वह फरीदाबाद में सोनपपड़ी बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं। उनकी पत्नी क्रांति 3 बच्चों के साथ गांव में रहती है। उनका आरोप है कि 16 अक्तूबर को पत्नी 45 दिन के छोटे बेटे को दवा दिलाने कासगंज आई थी। दोपहर करीब 3 बजे कासगंज बस स्टैंड पर उसने बच्चे को एक अज्ञात महिला को सौंप दिया और वापस आने पर महिला के गायब होने की बात कही। पत्नी ने खुद को बचाने के लिए इसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 1076 पर भी दी थी। अरविंद ने आरोप लगाया कि गहनता से जानकारी करने पर उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी ने सोरों के लहरा रोड पर क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर अरुण और उनकी पत्नी पिंकी के साथ मिलकर बच्चे को किसी दंपती को बेच दिया। आरोप है कि इसके बदले मिले 1.20 लाख रुपये पत्नी के बैंक खाते में जमा कराए गए और 10 हजार रुपये उसे नकद दिए गए। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की तो पूरा मामला खुल गया।
बालक के गायब होने की सूचना पर पुलिस टीमों को लगाया गया था। बच्चे को सकुशल तलाश कर मां समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में 80 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। मां के बैंक खाते में जमा शेष धनराशि की निकासी पर रोक लगाई गई है।
-आंचल चौहान, सीओ सदर, कासगंज