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Kasganj News: व्यापारियों को बताए जीएसटी सुधार के फायदे

Sat, 17 Jan 2026 11:26 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
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फोटो29व्यापारी संवाद कार्यक्रम में मंचासीन सीडीओ वीरेंद्र सिंह व जानकारी देते जीएसटी अ​धिकारी - फोटो : खैरगढ़ सीएचसी पर मरीजों से पूछताछ करती शासन से आई टीम। संवाद
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कासगंज। राज्यकर विभाग ने श्रीगणेश इंटर के सभागार में शनिवार को व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान जीएसटी अधिकारियों ने जीएसटी सुधार, समस्याओं के समाधान, प्रवर्तन कार्य पर महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वहीं, अधिकारियों से संवाद करते हुए व्यापारियों ने अपने सुझाव भी दिए। मुख्य अतिथि सीडीओ वीरेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधार के लिए विभाग एवं व्यापारियों के बीच नियमित संवाद होना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के राजस्व में सर्वाधिक योगदान देने के लिए व्यापारियों का आभार व्यक्त किया। उपायुक्त राजकुमार ने कहा कि जीएसटी 2.0 आम जनमानस व व्यापारियों के हित में बड़ा सुधार है। उपायुक्त रामेश्वर दुबे ने कहा कि घटी हुई जीएसटी दर एक उपहार है। उन्होंने जीएसटी के विभिन्न लाभकारी प्रावधानों पर चर्चा की। सहायक आयुक्त प्रभारी सचल दल एम इम्तियाज सिद्दिकी ने रिटर्न फाइलिंग के से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने इसके समाधान के बारे में बताया। प्रवर्तन कार्य प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण बातें बताईं। सहायक आयुक्त प्रशासन सत्यप्रकाश उमराव ने मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना, पंजीयन के लाभ आदि के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। सहायक आयुक्त खंड-1 रामअनुज मौर्य ने ईंट भट्ठा व्यापारियों से संबंधित प्रावधानों एवं टीडीएस व टीसीएस रिटर्न संबंधी जानकारी दी। कार्यक्रम में व्यापारियों ने संवाद स्थापित किया। इस दौरान राज्यकर अधिकारी उदय शंकर, अनीता उपाध्याय, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल सुरेश वाष्र्णेय, नगर अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल, अमित प्रकाश महाजन, राकेश अग्रवाल, कर अधिवक्ता श्यामसुंदर माहेश्वरी व साकेत बिंदल,राकेश बिड़ला, सीए विवेक तायल, माधव माहेश्वरी, अनुराग वाष्र्णेय, विकास गुप्ता, पीयूष अग्रवाल, हिमांशु माहेश्वरी, सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। वहीं, व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ने संवाद कार्यक्रम में कहा कि जीएसटी के पंजीकृत व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा की धनराशि दस लाख से बढ़ाकर 50 लाख की जाए। जीएसटी रिकॉर्ड रखने की समय सीमा निर्धारित हो। जीएसटी इन्वायस पर दिया गया उधार सामान की बकाया राशि सरकारी बकाए की तरह वसूली जाए। बाजारों में माल का आवागमन करने वाले रिक्शे आदि को रोका न जाए।
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