फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kasganj News: खास पैदावार के लिए आम के साथ करें ये विशेष काम

Fri, 12 Dec 2025 11:24 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
विज्ञापन
फोटो12 कासगंज आम के बाग का फोटो। स्रोत: कृ​षि विज्ञान केंद्र
विज्ञापन
कासगंज। आमतौर पर फरवरी-मार्च में आम के पेड़ों पर बौर खिलना शुरू हो जाता है। आम के पेड़ों पर बौर आने से पूर्व दिसंबर महीने में बाग में जलवायु, पोषण, सिंचाई, कटाई छंटाई और कीट एवं रोग प्रबंधन कर दिया जाए तो गर्मियों में यह अच्छी और गुणवत्तापरक पैदावार देता है।
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि दिसंबर के महीने में आम के बागों में सिंचाई नहीं करनी चाहिए। यदि मिट्टी में नमी कम है तो पेड़ से दूर मिट्टी में पानी दें। नाइट्रोजन का प्रयोग न करें क्योंकि नाइट्रोजन से नई पत्तियों का विकास होता है जिससे पुष्पन में बाधा आती है। इसके अतिरिक्त पेड़ों से सुखी एवं रोगग्रस्त टहनियों को काटकर अलग कर देना चाहिए। कटाई-छंटाई से वायु का संचार बेहतर होता है। पेड़ों के चारों तरफ मल्च डालें जिससे तापमान नियंत्रित रहे। साथ ही जैविक खाद अथवा वर्मी कंपोस्ट से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं। बागों में हल्की जुताई करने से हानिकारक कीट और खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। ठंड से बचाव हेतु बाग के चारों तरफ धुआं तथा कड़ाके की सर्दी और पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई करना चाहिए। दिसंबर का महीना आम के बागों के प्रबंधन हेतु बेहद महत्वपूर्ण समय है। उचित प्रबंधन से पुष्पन बढ़ने के साथ अच्छी मात्रा और गुणवत्ता की फसल पाई जा सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि सामान्यतः कहीं कहीं आम के पेड़ों पर टहनियां सूख जाती हैं। यह डाई बैक रोग होता है। ऐसी स्थिति में सूखी टहनी से 5 से 10 सेमी आगे हरी टहनी तक काटकर अलग कर देना चाहिए। साथ ही उसी दिन 3 ग्राम प्रति लीटर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव कर पुनः 10 से 15 दिन बाद छिड़काव दोहराएं। इसके अलावा गमोसिस की रोकथाम के लिए पेड़ की उम्र अनुसार तने पर 200 से 400 ग्राम कॉपर सल्फेट लगाना चाहिए। साथ ही पाउडरी मिल्ड्यू की रोकथाम हेतु घुलनशील सल्फर आधारित 2 ग्राम प्रति लीटर फंफूद नाशक तथा एंथ्राक्नोज रोग की रोकथाम हेतु 3.0 ग्राम प्रति लीटर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग करें। तना छेदक और माहूं जैसे कीटों की रोकथाम के लिए 2.0 मिली प्रति लीटर क्लोरपायरिफोस का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त मिली बग कीट नियंत्रण के लिए 1.0 मिली प्रति 100 लीटर के हिसाब से पेड़ की मिट्टी में अथवा 250 ग्राम प्रति पेड़ क्लोरपायरिफोस ग्रेन्यूल्स बुरकें। पेड़ की छाल खाने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए तने की सफाई कर 0.5 मिली प्रति लीटर मोनोक्रोटोफोस छिड़ककर छेदों को वैक्स अथवा मिट्टी से बंद कर देना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा कासगंज में किसी भी कार्यदिवस में संपर्क कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें