कासगंज। न्याय व्यवस्था में भले ही विलंब हुआ हो, लेकिन अदालत के कड़े फैसले ने क्रूरता की हदें पार करने वाले एक मामले में पीड़ित को इंसाफ दिला दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) खान जीशान मसूद की अदालत ने 17 साल पुराने एक मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी अनार सिंह को धारा 326 के तहत दोषी पाते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामले में सोरोंजी के लहरा वरकुला निवासी स्वर्गीय बादाम सिंह ने 6 जनवरी 2009 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि बदायूं जिले के दीननगर शेखूपुर निवासी उनके साले वीरपाल 5 जनवरी 2009 को उनके घर आ रहे थे। अत्यधिक ठंड के चलते रास्ता भटक जाने के कारण वीरपाल गांव गोयती स्थित अनार सिंह के ट्यूबवेल पर आग तापने चले गए थे।
वहां मौजूद अनार सिंह ने उन्हें चोर-चोर कहकर पकड़ लिया और राम सिंह सहित अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर लाठी-डंडों से उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी। ईंटों से उनके पैर कुचले गए और प्लास से नाखून तक उखाड़ लिए गए थे।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी अनार सिंह और रामसिंह के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी रामसिंह की मृत्यु हो जाने के कारण वर्ष 2015 में उसके विरुद्ध न्यायिक कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए चिकित्सीय साक्ष्यों और डॉक्टर की गवाही से सिद्ध हुआ कि पीड़ित के पैरों के नाखून किसी औजार या प्लास से जबरन उखाड़े गए थे, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि आरोपी का यह कृत्य अत्यंत क्रूर और अमानवीय था।