फोटो26पटियाली के मूंजखेड़ा क्षेत्र में नाव पर सवार होकर स्कूल जाते बच्चे। संवाद
पटियाली। आपदा चाहे कितनी भी बड़ी हो, अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। इसकी जीती-जागती मिसाल पेश कर रहे हैं पटियाली के बाढ़ प्रभावित गांव मुझखेड़ा और नगला दुर्जन के बच्चे।
चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी और डूबे हुए रास्तों के बावजूद इन बच्चों के कदम नहीं थमे हैं। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए इन बच्चों ने नाव को ही अपनी स्कूल बस बना लिया है। पटियाली के मुझखेड़ा और नगला दुर्जन समेत करीब 20 गांव इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है।
गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले सभी रास्ते जलमग्न हो चुके हैं, जिससे स्कूल जाना एक कठिन चुनौती बन गया था। लेकिन बच्चों और उनके अभिभावकों ने इस मुसीबत के आगे घुटने नहीं टेके। हर सुबह बच्चे अपनी किताबों का बैग संभालते हैं और नाव में सवार होकर स्कूल के लिए निकल पड़ते हैं।
शिक्षकों ने की तारीफ
नाव में बैठकर उफनते पानी के बीच स्कूल जाते नन्हें-मुन्नों की हिम्मत देखकर स्थानीय ग्रामीणों की आंखें नम हो जाती हैं। शिक्षकों ने भी बच्चों के इस समर्पण और लगन की जमकर तारीफ की है। अध्यापकों का कहना है कि ये बच्चे हम सभी को सिखाते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, इंसान को अपने लक्ष्य से कभी भटकना नहीं चाहिए।
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मुझखेड़ा के मुकेश कुमार और कांशीराम का कहना है कि बाढ़ ने हमारा सब कुछ रोक दिया है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी। रोज सुबह बच्चों को नाव से स्कूल जाते देख आंखें भर आती हैं। इनकी लगन काबिल-ए-तारीफ है।
अस्थायी पुल बनवाने की मांग
गांव वालों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि बच्चों की जान-जोखिम को देखते हुए बाढ़ के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं। प्रशासन से जल्द से जल्द अस्थायी पुल बनाने की मांग की गई है, ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल आ-जा सकें। साथ ही बच्चों के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था की जाए।