कासगंज। सहावर थाना क्षेत्र के गांव चेहका गुनार में आंबेडकर जयंती शोभायात्रा के दौरान हुए बवाल के चार आरोपियों की जमानत अर्जी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने खारिज कर दी। मामले में सहावर थाना प्रभारी गोविंद बल्लभ शर्मा ने 36 नामजद समेत 15 अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर बीती 14 अप्रैल को परंपरागत शोभायात्रा चेहका गुनार गांव में एक जाति विशेष के मोहल्ले में पहुंची तो वहां ट्रैक्टर-ट्राॅली, बुग्गी लगाकर रास्ता रोक लिया गया था। आरोपी राजीव यादव, राहुल यादव, रामप्रकाश यादव व अमर सिंह ने भीड़ को उकसाया तो उपद्रव शुरू हो गया था। पुलिस ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया तो उपद्रवियों ने हमला बोल दिया था। घरों की छतों से महिलाओं व युवकों ने पथराव शुरू कर दिया था। इस दौरान सिपाही अश्वनी मलिक और महिला आरक्षी रेखा शर्मा घायल हो गए थे। पथराव से भगदड़ मच गई थी। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के तीन गोले दागे और हल्का बल प्रयोग करके आरोपी उदयवीर, मुनेंन्द्र, वीरेश, अजीत, गोविंद, मुन्नालाल, अभिलाख सिंह, उपेन्द्र, विनीत, सतेंन्द्र, संजीव, जयगोपाल, रामौतार और अमित समेत चार बाल अपचारियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान कुछ उपद्रवी मौके से भाग गए थे। इन्हें पुलिस ने बाद में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बवाल मामले में 25 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
मामले में आरोपी संजीव, अमित, मुन्नालाल और जयगोपाल ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिकाएं लगाईं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें गांव की गुटबाजी के कारण रंजिशन झूठा फंसाया गया। वर्ष 1988 से उस मार्ग पर शोभायात्रा नहीं निकाली जा रही थी, लेकिन इस वर्ष उन्हें गुमराह करके नई परंपरा शुरू की गई। वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद जमानत याचिकाओं को निरस्त कर दिया।