सोरोंजी। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर तीर्थ नगरी शूकरक्षेत्र (सोरो) में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र पंचकोसी परिक्रमा लगाई। सुबह तड़के ही श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी के पवित्र जल में स्नान कर गंगा मैया और भगवान वराह का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और पुण्य लाभ कमाया।
इसके बाद, ब्राह्मण कल्याण सभा एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के तत्वावधान में वराह घाट से पंचकोसी परिक्रमा का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर परिक्रमा संयोजक शरद कुमार पांडे ने कहा कि यह व्रत वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा गया है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखता है, उसे साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने वराह गोशाला, चक्रतीर्थ, सूर्यकुण्ड, चंद्रकुंड, जया देवी भद्रकाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, प्राचीन गृद्धवट, ग्राम देवी मंदिर, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, चौरासी घंटे वाली मैया एवं बाछरु महाराज सहित विभिन्न पवित्र स्थलों के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। समाजसेवियों ने श्रद्धालुओं को 84 घंटे वाली माता, सीता रसोई, ममता देवी भवन, सिंग्नल वाले महाराज सहित अन्य स्थानों पर फल व शरबत आदि का वितरण किया।
इस दौरान रामदर्शन महेरे, नीरज तिवारी, ओमप्रकाश मौर्य, आकाश निर्भय, विकास निर्भय, मुन्नालाल बड़गैयां, गिरीश पाठक, अशोक धमनावत, विजय तिवारी, अवधेश तिवारी आदि ने फल , शरबत आदि का वितरण किया गया। इसके बाद श्रद्धालु आगे बढ़ते हुए करुआ देव महाराज, भगीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर तथा चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन करते हुए वराह मंदिर पहुंचे।