कासगंज। सहालग के आगमन के साथ ही दुल्हनों के परिधानों में परंपरा और आधुनिकता का मनमोहक मेल देखने को मिल रहा है। दुल्हनों की पसंद में एक ओर जयपुरी लहंगों की बारीक कारीगरी और राजसी रंगत खास जगह बना रही है तो दूसरी ओर बनारसी व रेशम की साड़ियां भी लुभा रही हैं।
शादी-ब्याह के मौसम में बढ़ी खरीदारी से बाजारों में चहल-पहल लौट आई है। इस सहालग में हर आयु वर्ग की महिलाएं पारंपरिक सौंदर्य के साथ आधुनिक अंदाज को अपनाते हुए अपने परिधान चयन में संतुलन बनाती नजर आ रही हैं। महिलाओं की पहली पसंद हल्के वजन और चमकदार फिनिश के परिधान युवतियों को खूब भा रहे हैं। वहीं, डोला कपड़े की साड़ियाें और लहंगों की भी मांग हैं। यह कम कीमत में शानदार लुक देते हैं।
फैशन के बदलते रुझानों में कपड़े को मोड़कर और कुचलकर तैयार किए गए परिधान खासा आकर्षण में हैं। ये डिजाइन न अलग दिखते हैं बल्कि इन्हें पहनना भी बेहद सहज और आरामदेह होता है। इसके साथ ही सिफॉन की साड़ियां एक बार फिर फैशन में लौट आई हैं। हल्की, लहराती और सादगी भरी सिफॉन साड़ियां दुल्हन की सहेलियों और विवाह समारोह में शामिल होने वाली महिलाओं की पहली पसंद बनती जा रही हैं।
विक्रेता पंकज अग्रवाल का कहना है कि सहालग को ध्यान में रखते हुए नई रेंज बाजार में उतारी गई है जिन्हें महिलाएं पसंद कर रही हैं। वहीं, दीपक अग्रवाल ने बताया कि इस बार खरीदारी का रुझान बदला है और महिलाएं फैशन के अनुरूप परिधानों का चयन कर रही हैं।
रस्मों के हिसाब से अलग-अलग परिधान
सहालग के मौसम में महिलाएं हल्दी, मेहंदी, संगीत और विवाह जैसी सभी रस्मों के लिए अलग-अलग परिधानों की खरीदारी कर रही हैं। हल्दी के लिए हल्के और चमकीले रंग, मेहंदी के लिए आरामदायक और ट्रेंडी डिज़ाइन, संगीत के लिए आकर्षक परिधान तथा विवाह के लिए पारंपरिक और भव्य पोशाकें पसंद की जा रही हैं। इससे बाजार में विविधता, रौनक और खरीदारी का दायरा बढ़ा है।