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Kasganj News: जिले में स्तनपान दर में आई 3.3 फीसदी की गिरावट

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कासगंज। मां का दूध शिशु के लिए न सिर्फ पहला आहार है, बल्कि उसकी शुरुआती पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य आधार भी है। हालांकि, जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराने की सलाह के बावजूद जिले में इसके आंकड़े चिंताजनक रूप से घटे हैं।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में जिले में छह माह तक केवल स्तनपान कराने का आंकड़ा 92.4 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जो सर्वे-6 में घटकर 89.1 प्रतिशत पर आ गया है। करीब तीन प्रतिशत की यह गिरावट समाज में स्तनपान को लेकर व्यवहार और जागरूकता में सुधार की सख्त जरूरत की ओर इशारा करती है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव सक्सेना के अनुसार, मां के दूध में नवजात के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व होते हैं, जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर संक्रमण से बचाते हैं। इसके अलावा, स्तनपान मां और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ते को भी गहरा करता है।
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स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कई माताएं कुछ समय बाद स्तनपान बंद कर डिब्बाबंद या पशु का दूध देना शुरू कर देती हैं, जिसके प्रति माताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है।

मां के लिए भी लाभकारी स्तनपान कराना
शिशु के साथ-साथ स्तनपान मां के स्वास्थ्य के लिए भी वरदान साबित होता है। यह स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, प्रसव के बाद रक्तस्राव नियंत्रित करने, गर्भाशय को सामान्य स्थिति में लाने तथा टाइप-2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप के जोखिम को घटाने में भी यह बेहद सहायक है।
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बच्चे को ये फायदे होते हैं
डायरिया समेत कई संक्रमणों का खतरा कम करने में मदद
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
शारीरिक विकास और पोषण में मदद
मां और बच्चे के बीच भावनात्मक लगाव मजबूत होता है
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वर्जन
मां का दूध शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण आहार है। जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को जागरूक किया जाता है। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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