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'तंगी से त्रस्त' युवक घर से निकला, फिर जो जानकारी मिली उसने परिवार को हिलाकर रख दिया

Thu, 30 Aug 2018 06:08 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अनिल का फाइल फोटो, इसी झोपड़ी में रहता है परिवार    - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में कासगंज थाना सहावर के गांव अमोरे निवासी अनिल (18) पुत्र जगदीश अपनी ननिहाल कायमगंज के गांव सलेमपुर टिलियां में मां आशा के साथ रहता था। उसका बड़ा भाई सुनील (22) घर से रूठ कर कुछ माह पूर्व कहीं चला गया है। उसके परिवार में मामा रामदास और बहन गुड़िया (16) हैं। वह कोई काम धंधा नहीं करता था। गरीबी के चलते आए दिन घर में कलह होती थी। इसके चलते गुरुवार रात वह घर से किसी समय निकल गया।
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परिजनों ने इधर-उधर तलाश भी किया, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। सुबह गांव से कुछ दूर खेत में एक पेड़ पर उसका शव फंदे से लटका मिला। जानकारी मिलने पर उसकी मां व बहन गुड़िया भी रोती बिलखती मौके पर पहुंच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव फंदे से उतरवाकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। बताया गया कि पति जगदीश से विवाद के चलते करीब 15 वर्ष साल वर्ष पूर्व आशा अपने तीन बच्चों को लेकर मायके आ गई थी। तब से वह यहीं रह रही है। आशा के माता-पिता नहीं हैं। भाई रामदास की शादी नहीं हुई है। रामदास ने बच्चों का पालन-पोषण किया है। 


 

शव ले जाने के लिए ट्रैक्टर के किराए के पैसे नहीं 

घटनास्थल पर कार्रवाई करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
शव ले जाने के लिए ट्रैक्टर के किराए के पैसे नहीं 
आशा, उसकी बेटी गुड़िया व भाई रामदास परिवार का भरण पोषण करने के लिए तंबाकू के गोदाम पर काम करते हैं। अनिल काम धंधा नहीं करता था। पूरा परिवार एक झोपड़ी में रहता है। पुलिस शव पोस्टमार्टम को भेजने की कार्रवाई कर रही थी। तभी आशा ने बिलखते हुए कहा कि उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह किराए पर ट्रैक्टर कर शव पोस्टमार्टम हाउस ले जा सके। वह अंतिम संस्कार भी मुश्किल से कर सकेगी।


दो माह पहले बना पात्र गृहस्थी कार्ड, नहीं मिला आवास 
अंत्योदय राशन कार्ड बनवाने के लिए प्रधान व अन्य अधिकारियों का चक्कर लगाकर थक गई, पर उसका अंत्योदय कार्ड नहीं बन सका। दो माह पूर्व किसी तरह पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बना। आशा जिस झोपड़ी में परिवार के साथ रहती है, उसकी हालत दयनीय है। बारिश का पानी नीचे न आए, इसके लिए उस छप्पर पर फटी हुई मोमिया पड़ी है। उनके पास इतने भी पैसे नहीं कि वह सही मोमिया भी खरीद ले। 

 
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उसे आवास दिलाया जाएगा- एसडीएम सदर 

इसी झोपड़ी में रहता है परिवार   - फोटो : अमर उजाला
सीओ से मामले की जानकारी मिली है। प्रधान से बात हुई है। उसे आवास दिलाया जाएगा। साथ ही आर्थिक मदद के लिए किसी योजना के तहत पेंशन आदि की व्यवस्था कराई जाएगी। - अनिल कुमार, एसडीएम सदर 

प्रधान पति सोहेल ने बताया कि दो माह पूर्व प्रधानमंत्री आवास की जो सूची बनाकर भेजी गई है। उसमें आशा का नाम है। अंत्योदय कार्ड पुराने सर्वे के आधार पर बनते हैं। आशा का पात्र गृहस्थी कार्ड बनवा दिया है। शव ले जाने के लिए उन्होंने किराए आदि की व्यवस्था कर दी थी।
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