हमारे जवान किसी भी देश की सरहद में घुस जाएंगे तो दुश्मन ढूंढ नहीं पाएगा। टेक्नोलॉजी डे पर रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर में लगाई गई प्रदर्शनी में कुछ ऐसी खूबियों वाले उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। परमाणु हमला होने के बाद भी टैंक में बैठे जवान सुरक्षित रहेंगे। हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर में बैठे पायलट को सामने से आ रही दुश्मन की गोली नहीं मार पाएगी। पेश है एक रिपोर्ट...
विज्ञापन
कंपोजिट आर्मर पैनल
2 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर की कॉकपिट में सिरैमिक, पाली रबर के मिश्रण के बने कंपोजिट आर्मर पैनल की कोटिंग की गई है। इससे पायलट और को पायलट को सामने से आ रहे दूसरे लड़ाकू विमान की गोलियां निशाना नहीं बना पाएंगी। इस पैनल पर एयरफोर्स में इस्तेमाल होने वाली गोली का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एचएएल बंगलुरू की आवश्यकता पर डीएमएसआरडीई में इसे विकसित किया है।
विज्ञापन
न्यूक्लियर बम कॉम्बेट (एनबीसी) पैड
3 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
इसे टी-90 और बीएमपी टू व टू के टैंक पर लगाया जाता है। इस पैड को लगाने के बाद टैंक के भीतर बैठे सेना के जवानों पर किसी भी प्रकार के परमाणु हमले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसमें विशेष रबर और विशेष मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है।
टारपीडो पनडुब्बी होगी और हल्की
4 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
मौजूदा पनडुब्बी टारपीडो में इलेक्ट्रिकल जेनरेटर होते हैं जो मेटल के बने होते हैं। मेटल होने के कारण पनडुब्बी का भार अधिक हो जाता है। संस्थान में ऐसे कार्बन नैनो ट्यूब विकसित किए गए हैं जो बेहद हल्के होते हैं। इनके इस्तेमाल से न केवल पनडुब्बी की लाइफ बढ़ेगी बल्कि उसका वजन भी कम होगा। ऐसा होने पर पनडुब्बी में हथियार रखने की क्षमता बढ़ जाएगी।
विज्ञापन
दुश्मन नहीं ढूंढ पाएगा
5 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
संस्थान में मल्टी स्पेक्ट्रल कैमो फ्लेज नेट बनाया गया है। इसके माध्यम से 500 मीटर दूरी पर बैठा दुश्मन भी जवानों को ढूंढ नहीं सकेगा। नेट के पीछे जवानों की छोटी बटालियन और हथियारों को छिपाया जा सकता है। इसे रडार, कैमरे भी नहीं पकड़ पाएंगे। इसमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो रडार से निकलने वाली किरणों को अवशोषित कर लेगा। इस तरह एक मैटीरियल तैयार किया गया। जिसकी कोटिंग लड़ाकू विमानों में कर दी जाए तो उसे पकड़ा नहीं जा सकेगा। इसके अलावा टैंक को छिपाने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विज्ञापन
हाथी के पैर से भी नहीं पिचकेगी बोतल
6 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में सेना को दी जाने वाली एक लीटर पानी की बोतल का प्रदर्शन किया गया। बताया गया कि यह इतनी मजबूत है कि हाथी अपना पैर भी रख दे नहीं टूटेगी। इसे इस तरह से बनाया गया है कि कहीं फंसा होने पर जवान थोड़ा-थोड़ा पानी पी सके। माइनस 40 से लेकर 140 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विज्ञापन
इनका भी किया प्रदर्शन
7 of 8
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
बुलेट प्रूफ जैकेट, एंटी माइन बूट, बैलेस्टिक हेलमेट, केमिकल प्रोटेक्ट सूट, ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट, मोबाइल कैमोफ्लेज सिस्टम, एनबीसी प्रिएंबेल सूट मार्क , कैजुअलटी बैग, सबवाइबल ब्लैंकेट, लाइफ जैकेट, एनबीएस ओवर बूट, सीबीआरएन प्रोटेक्टिव ओवर बूट्स मार्क थ्री, एनबीएस ग्लब्स विथ इनर, माड्यूलर बुलेट प्रूफ जैकेट, बुलेट प्रूफ आउटर वेस्ट के अलावा कई प्रकार के मैटीरियल का प्रदर्शन किया गया।
वॉटर कंटेनर अलॉय
20 लीटर क्षमता वाले वाटर कंटेनर में सियाचिन जैसे बर्फीले स्थानों पर भी पानी नहीं जमेगा। बार-बार जवानों को पानी गर्म नहीं करना पड़ेगा। एक बार में इसमें दो घंटे तक सामान्य बना रहेगा। जिसका इस्तेमाल जवान कर सकेगा।
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) ने लगाई प्रदर्शनी
प्रदर्शनी देखने आर्मी पब्लिक स्कूल, श्रीराम पब्लिक स्कूल, जयपुरिया, मैथाडिस्ट, डा. वीरेंद्र स्वरूप श्याम नगर, सुघर सिंह एकेडमी के बच्चे शिक्षकों के साथ पहुंचे। प्रदर्शनी में उन्होंने कई स्टॉलों पर जानकारी हासिल की और फोटो खिंचवाई। इस दौरान संस्थान के कार्यकारी निदेशक एसबी यादव, वैज्ञानिक अशोक रंजन, वैज्ञानिक डा. डीएन त्रिपाठी, मीडिया संयोजक राजेश जैस, डा. टीएच गोस्वामी, प्रदीप सक्सेना, मनोज सिंह, एसके शाक्यवार, राज कुमार, विजय पाल आदि मौजूद थे।