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इस शहर में होते हैं बदलते भारत के दर्शन

Thu, 16 Feb 2017 02:53 PM IST
आर्यन शर्मा/ अमर उजाला, कानपुर
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ऐतिहासिक नगरी
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कनपुरिया मतलब खुद्दार और यारबाज। ऐतिहासिक नगरी कानपुर के मोहल्लों के नाम अलबेले यूं ही नहीं हैं। नामों का ये अलबेलापन कनपुरिया ठाठ को बखूबी दर्शाता है। हटिया, गुटैया, नरियल बजार, नौघड़ा, भूसाटोली, दानाखोरी, बेकन गंज, मूलगंज, नई सड़क, चौबेगोला, दादानगर ,बांसमंडी, दालमंडी, काहूकोठी, फीलखाना, मनीराम की बगिया, चावल बाजार जैसे नाम के मोहल्ले इस शहर में हैं। 
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कानपुर उत्तर प्रदेश की राजधानी तो नहीं है पर कानपुर उत्तर प्रदेश का सबसे खास शहर है। गंगा नदी के तट पर बसा कानपुर सुन्दरता को दर्शाता है। हर किसी को चाहे वह किसी भी दूसरे शहर में रह रहा हो उसे कानपुर से रिलेशन होने का फख्र जरूर होता है।
आइये जानें कानपुर के बारे में कुछ रोचक बातें...

खर्चीला नहीं है कानपुर
कानपुर का मूल नाम 'कान्हपुर' था। बदलते हिंदुस्तान को जानने के लिए कानपुर आना पड़ेगा। कुछ ज्यादा खर्चीला नहीं है कानपुर। यहां फाइव स्टार कल्चर ज्यादा ना होने की वजह से यहां आने वाले हर मुसाफिर को सस्ते होटल धर्मशाला की सुविधा मिल जाती है। यहां 25 रुपये से भी कम कीमत में एक समय का भोजन मिल जाता है। सुबह नाश्ते में किसी भी जगह से सफेद मक्खन लगी ब्रेड और मठ्ठा का आनंद लिया जा सकता है।
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बदलता भारत
कानपुर आकर आपको एक बदलते हुए भारत के दर्शन होते हैं। यह वो शहर है जहां बसपा और सपा की सुदृढ़ सरकारों के बावजूद जातियां मुख्यधारा में नहीं आई हैं बल्कि जातियों के भीतर का जातिवाद और ताकतवर होकर पनपा है। रोटी के लिए यहां के लोग बदले हैं जब आप देखते हैं सचान शू वियर या सिंह हेयर कटिंग सैलून, यादव मिष्ठान्न, जाटव लस्सी या पंडित पिगरी तब यह एहसास तो होगा ही कि शहर बदल रहा है। 

उपजाऊ मिट्टी
यहां पर कृषि हदबंदी कहीं नहीं है।  यह अलग बात है कि बैलों का प्रयोग खेती के लिए अब कम होता नजर आ रहा है। अब लोग या तो खुद ट्रैक्टर खरीद कर जमीन जोते-बोते हैं या तो किराये पर ट्रैक्टर लेकर खेती करते है। कानपुर शहर की उपजाऊ मिट्टी में हर प्रकार की खेती की जा सकती है ।

मदद के लिए हमेशा तैयार
कानपुर में अब ईंट के भठ्ठों ने खेत और बगीचे समाप्त कर दिए हैं। कानपुर के लोग सबको अपना मानते है। कानपुर के लोगों को अच्छा लगता है मुसाफिरों से मिलना और उनसे बात करना और मदद करने को भी तैयार रहते है। 
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योद्धाओं की जन्मभूमि कानपुर को योद्धाओं की जन्मभूमि के लिए भी जाना जाता हैं । यहां पर बड़े-बड़े शूरवीरो ने जन्म लिए हैं। जैसे कि चंद्र शेखर आज़ाद , मंगल पांडे
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