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मक्के से बनाया जाएगा 'बायोफ्यूल' 'प्लास्टिक' 'फूड प्रोडक्ट', जानिए इससे आपकी जेब पर होगा क्या असर

Sun, 25 Nov 2018 12:23 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक, योगेंद्र नाथ
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एचबीटीयू कानपुर के 1968 बैच के छात्र योगेंद्र नाथ भी एल्युमनाई मीट में शामिल होने के लिए न्यूजर्सी से पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह एक साल के अंदर लखनऊ में बायो रिफाइनरी कंपनी स्थापित करने वाले हैं। इसके लिए राज्य सरकार से इसी वर्ष समझौता किया था। सरकार ने लखनऊ के मल्लावां गांव के समीप 154 एकड़ भूमि उपलब्ध करा दी है।
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यहां मक्के की खेती करेंगे और उससे बायोफ्यूल, फूड प्रोडक्ट और प्लास्टिक प्रोडक्ट तैयार करेंगे। 2019 तक उनकी बायो रिफाइनरी कंपनी स्थापित हो जाएगा और 2021 तक उनके प्रोडक्ट भी बाजार में उपलब्ध होंगे। योगेंद्र ने बताया कि उन्होंने यहां से पढ़ाई करने के बाद इटली से पेट्रोलियम में मास्टर्स और फिर अमेरिका से केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया।

 
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पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी  

योगेंद्र नाथ - फोटो : शिवम वर्मा, छात्र HBTU
इसके बाद 12 साल एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब की। 1990 में सात करोड़ रुपये लगाकर उन्होंने वहीं पर बायोकेम नाम की कंपनी शुरू की जिसका टर्नओवर आज 100 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब वह अपनी इस कंपनी की ब्रांच को भारत में स्थापित करेंगे।

योगेंद्र नाथ ने बताया कि अमेरिका में बायो फ्यूल पर काफी काम हो रहा है। वहां एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के अलावा सबसे ज्यादा मक्के की खेती होती है। मक्के से एथेनॉल तैयार किया जाता है और उसी के प्रयोग के जरिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम की गई है। भारत में भी जब ऐसा होगा तब पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम हो जाएगी। 
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