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गर्मी जाओगे भूल, योग-आयुर्वेद रखेगा ‘कूल’

Thu, 15 Jun 2017 04:03 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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गर्मी की मार बेतहाशा परेशान कर रही है। रात में नींद नहीं, दिन में बेचैनी। अपच, उल्टी और न जाने कितनी बीमारियां घेर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योग और आयुर्वेद में ऐसे कई नुस्खे हैं जो गर्मी को मात दे सकते हैं। इन्हें आजमाने से आपका दिमाग और शरीर दोनों कूल (शीतल) रहेंगे।
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घरेलू नुस्खे भी कारगर
आयुर्वेदिक व योग स्पेशलिस्ट डॉ. रवींद्र पोरवाल ने बताया कि कुछ घरेलू, आयुर्वेदिक व यौगिक तरीके हैं जिनसे आपके शरीर का तापमान मेंटेन रहेगा और लू, डिहायड्रेशन जैसी बीमारियां भी नहीं होंगी।

आयुर्वेदिक टिप्स
- गर्मी से बचने के लिए जब भी घर से बाहर निकले खूब पानी पीकर निकलें और उसके बाद आठ या दस पुदीने की पत्तियां चबाएं। इससे हीट स्ट्रोक नहीं होता है। छोटे बच्चे को दाल या सब्जी में मिलाकर पुदीना खिलाएं।
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- कपूर और नारियल का तेल सिर में लगाएं। कपूर दिमाग को ठंड़ा रखता है जिससे शरीर की गर्मी दिमाग में नहीं चढ़ती।
- बेल का शर्बत खूब पीएं। इससे आंतों की गर्मी बाहर निकलती है और शरीर शीतल रहता है।
- अगर ज्यादा पसीना आता है तो रात में सोने से पहले पैरों के तलवे में पांच से छह पुदीना के पत्ते पीसकर लगाएं। इससे गहरी और शांत नींद आती है साथ ही बॉडी भी ठंड़ी रहती है।
- गर्मियों में कई बार शरीर में पोटैशियम व सोडियम की कमी हो जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए तरबूज के रस में काला नमक या जलजीरा मिलाकर पीएं।
- प्रात: काल मुंह में पानी भरकर नहाएं। इससे शरीर की गर्मी दिमाग में नहीं चढ़ती है और मन शांत रहता है।

यौगिक तरीके
योग टीचर सुप्रिया विद्यार्थी ने बताया कि कई ऐसे योग हैं जिससे शरीर की गर्मी को बैलेंस किया जाता है। सुदर्शन क्रिया एक बहुत ही कारगर क्रिया है जिससे शरीर और मन दोनों शांत होते हैं। साथ ही, बॉडी में एनर्जी लेवेल बढ़ता है। डॉ. पोरवाल ने बताया कि शीतली व शीतकारी बहुत ही कारगर प्रणायाम है जिससे शरीर की गर्मी दूर होती है। वहीं, त्रियक भुजंगासन और चरणासन कुछ ऐसे योग है जो गर्मियों में शरीर को एक नहीं बल्कि कई फायदे देता है। सुदर्शन क्रिया, नौकासन भी फायदेमंद हैं।

ये प्राणायाम रहेंगे रामबाण
रोज सुबह-शाम तीन मिनट शीतली और शीतकारी प्रणायाम प्रणायाम करें। इनसे शरीर में ऑक्सीजन का संचार भरपूर मात्रा में होता है और वो शीतल बना रहता है।

शीतली प्राणायाम
इसमें मुंह को खोलकर गोलाकार तरीके से बना लें और फिर धीरे-धीरे सांस को अंदर की ओर खींचें। मुंह को बंद कर के थोड़ी देर तक सांस रोके रहें और फिर मुंह से बाहर निकाल दें।
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शीतकारी प्राणायाम
शीतकारी में दांतों को भींचकर होठों को बंद करके सांस लें। थोड़ी देर तक रोकने के  बाद इसको नाक से बाहर निकाल दें। इस प्रणायाम को रोज करें।  
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