मूसानगर। यमुना नदी का जलस्तर सोमवार को मामूली कम जरूर हुआ है। मगर बाढ़ प्रभावित 13 गांवों की दुश्वारियां जस की तस हैं। बाढ़ के पाने से घिरे गांव, खेतों में चारों तरफ भरा पानी और रुक-रुक कर हो रही बारिश ग्रामीणाें की चिंता बढ़ा रही हैं। चार दिन से आढ़न-पथार के लोग केवल नाव से आवागमन कर पा रहे हैं। अन्य गांवों के लोगों को दूसरे मार्ग से चक्कर लगाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
यमुना के तलहटी किनारे के गांव के लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से प्रभावित है। गांव के चारों ओर भरा पानी, नाव से आने-जाने के लिए इंतजार, मवेशियों के चारे का संकट और प्रभावित हो रहे कारोबार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि तीन बार बाढ़ आई। पहली बार में फसलें बर्बाद हो गई। घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा। अभी तक फसल नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिला कि दूसरी बार की बाढ़ ने संभलने का मौका तक नहीं दिया। किसी तरह से घरों की साफ सफाई कर गृहस्थी सुरक्षित की तो तीसरी बाढ़ ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।
यमुना नदी का जलस्तर सोमवार शाम को मूसानगर गेज में 106.02 मीटर दर्ज किया गया। रविवार शाम 6 बजे की तुलना में यह 0.26 सेमी कम रहा। वहीं कालपी गेज में जलस्तर सोमवार को 107.33 मीटर रहा। यह रविवार की तुलना में 0.06 सेमी कम रहा। मगर बाढ़ प्रभावित 13 गांवों की करीब 12 हजार से अधिक आबादी के लिए दुश्वारियां जस की तस हैं। तीसरे दिन भी 12 गांवों की बिजली आपूर्ति बंद रही।
क्षेत्र के आढ़न-पथार, पड़ाव, बम्हरौली घाट, नगीना बांगर की पुलिया लगातार चौथे दिन भी डूबी रही। इससे आढ़न, पथार, पड़ाव, कुम्भापुर, रसूलपूर, चतुरीपुरवा, भुंडा, नगीना बांगर, कट्टापुरवा, सूर्यपुर, बम्हरौली घाट, अहरौली घाट संपर्क कटा है। इससे चपरघटा के आढ़न पथार गांव ज्यादा प्रभावित है। आढ़न-पथार के आस-पास दो किमी दायरे में हर तरफ पानी नजर आ रहा है। इधर सोमवार को पूरे दिन रुक-रुक कर हुई बारिश ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
बारिश की वजह से लोगों को नाव से आवाजाही में भी परेशानी हो रही है। चपरघटा के पुराने पुल तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। आढ़न-पथार गांव सबसे अधिक प्रभावित है। लोगों का कहना है कि पहली बार बाढ़ आयी तो खाद्यान्न आदि मिला था। मगर दूसरी और तीसरी बार की बाढ़ में कोई मदद नहीं मिली। प्रशासन केवल बाढ़ चौकी बनाकर खानापूर्ति कर रहा है।
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यमुना जलस्तर शाम छह बजे 106.02 मीटर दर्ज किया गया है। यह रविवार की तुलना में 0.26 सेमी कम है। कालपी गेज में भी जलस्तर में मामूली गिरावट हुई है। - अनिल कुमार गुप्ता, केंद्रीय जल आयोग स्थल प्रभारी
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जलस्तर रविवार रात में थोड़ा बढ़ा था मगर सोमवार को गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि अभी मामूली गिरावट है। फिलहाल अभी जलस्तर बढ़ने की संभावना नहीं बताई गई है। दो से तीन दिन में जलस्तर कम हो सकता है। बाढ़ चौकियों पर सतर्कता बनाए रखे हैं। - देवेेंद्र सिंह, एसडीएम भोगनीपुर
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फोटो-14 कृष्ण गोपाल, पथार। संवाद
फोटो- 15 रवींद्र कुमार, पथार। संवाद
फोटो- 16 कुसमा देवी, पथार। संवाद
फोटो- 17 रामशंकर, पथार। संवाद
बार-बार आ रही बाढ़ तोड़ रही उम्मीद
पहली बार आयी बाढ़ में पांच बीघा फसल बर्बाद हो गई। दूसरी बाढ़ में बाजरा का बीज नष्ट हो गया। अब फिर बाढ़ से खेत जलमग्न हैं। बार-बार आ रही बाढ़ उम्मीद तोड़ रही है। - किशन गोपाल, पथार
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बाढ़ ने चौपट की बच्चों की पढ़ाई
लगातार बाढ़ दुश्वारी बनी है। पहली बाढ़ में दो बीघा तिल व ज्वार बर्बाद हो गया। नाव से आवागमन में परेशानी होती है। एक माह से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो सकी है। फीस फिर भी देनी पड़ेगी। - रवींद्र कुमार, पथार
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दस परिवारों काे नहीं मिला राशन
तीसरी बार बाढ़ आयी है। लगभग 10 परिवारों को राशन व खाद्यान अभी तक नहीं मिल पाया। कई बार लेखपाल को अवगत कराया। मगर राशन नहीं मिला। बाढ़ से फसल व चारा सब कुछ बर्बाद हो चुका है। - कुसमा, पथार
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बाढ़ से जन जीवन प्रभावित
बाढ़ से जन जीवन प्रभावित हुआ है। बिजली तीन दिन से गुल है। जीवकोपार्जन का साधन खेती है। खेत जलमग्न है तो चिंता गृहस्थी चलाने की चिंता सता रही है। मवेशियों के लिए चारा का संकट भी है। कम से कम बिजली बिल ही माफ हो जाए। - रामशंकर, पथार