कानपुर। कमिश्नरी पुलिस अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित यक्ष एप से अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकेगी। इस एप की मदद से अपराधियों की सिर्फ तस्वीरों से ही नहीं बल्कि उनकी आवाज, खांसने, छींकने जैसी शारीरिक हरकतों से भी पहचान की जा सकेगी। अब तक एप के लिए करीब 20 हजार हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर और अन्य अपराधियों का डेटा तैयार कर लिया गया है जिन्हें जियो-टैग किया गया है। आगामी तीन महीनों में 30 साल पुराने मामलों के आरोपियों का रिकॉर्ड भी इसमें शामिल कर लिया जाएगा।
बीट पुलिसिंग और पुलिस की कार्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए यक्ष एप लाॅन्च किया गया है। इसमें शातिरों के चेहरे, रेटिना, आवाज, खांसने, छींकने आदि के सैंपल रिकाॅर्ड किए जा रहे हैं। शातिर अगर किसी को धमकी देता है या फिर फोटो व वीडियो कहीं आती है तो उसकी तुरंत पहचान हो जाएगी। बीट सिपाहियों, दरोगा और इंस्पेक्टर के बदलने पर भी नए पुलिसकर्मी को अपराधिरियों की डिटेल के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। उन्हें यक्ष एप के माध्यम से सारी जानकारी मिल जाएगी।
यक्ष एप के नोडल अधिकारी, एसीपी रंजीत सिंह के अनुसार एप के लिए स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की जियो-टैगिंग की जा रही है। साथ ही अपराधियों के जेल में होने या किसी दूसरे शहर जाने जैसी जानकारी की जा रहा है। इसकी निगरानी पुलिस, क्राइम ब्रांच और मुख्यालय स्तर से की जा सकेगी। जेल से छूटने वाले किसी भी अपराधी की जानकारी संबंधित बीट सिपाही या थानेदार को तत्काल नहीं मिल पाती है जिससे उनकी निगरानी में बाधा आती है। अब जैसे ही कोई अपराधी जेल से रिहा होगा उसकी जानकारी तुरंत एप में फीड कर दी जाएगी जिससे थानेदार को अलर्ट मैसेज मिल जाएगा। यदि किसी गिरोह के चार-पांच सदस्य एक साथ रिहा होते हैं तो उस क्षेत्र को हॉट स्पॉट घोषित कर वहां विशेष निगरानी रखी जा सकेगी।
एप में क्राइम जीपीटी की सुविधा दी गई है। अगर किसी अपराधी, घटना या फिर संवेदनशील क्षेत्र की जानकारी करनी हो तो बस उसके बारे में दो शब्द लिख दे तो पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। किसी भी घटना, अपराध का मैसेज अधिकारियों को भेजना हो तो वह भी आसानी हो चला जाएगा।
यक्ष एप के लिए थानास्तर पर अपराधियों और क्षेत्र की डिटेल एकत्रित की जा रही है। यह अपराध को रोकने और अपराधियों की मॉनिटरिंग के लिए कारगर साबित होगा। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर