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Kanpur News: आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रोगी के जल्दी भरते घाव

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कानपुर। आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रोगी की बीमारी से रिकवरी जल्दी होती है। सर्जरी होने पर उसके घाव जल्दी भरते हैं। इससे उसे अस्पताल में कम रुकना पड़ता है। ऐेसे रोगी को बीमारी का ट्रॉमा भी कम होता और अवसाद में नहीं आता। यह बात किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के जीरियाट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ. कौसर उस्मान ने ब्रिटेन में हुए एक शोध के हवाले से बताई।
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यूपी एपीकॉनमें उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में आध्यात्मिक प्रवृति के 21 रोगियों पर यह शोध किया गया। इसे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित किया गया। उन्होंने बताया कि वज्रासन समेत अन्य यौगिक क्रियाओं, नमाज आदि से शरीर की मांसपेशियों पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। यौगिक क्रियाओं से सारकोपीनिया फ्रेलटी मर्ज में रोगी को फायदा होता है। आध्यात्मिक प्रवृति वाले व्यक्ति को तनाव कम होता है। इससे मस्तिष्क के न्यूरो ट्रांसमीटर का संतुलन जल्दी नहीं बिगड़ पाता।
साथ ही सारकोपीनिया फ्रेलटी के लक्षण उन्होंने बताए। डॉ. उस्मान ने कहा कि चार मीटर चलने में पांच सेकेंड से अधिक समय लगे तो यह फ्रेलटी का लक्षण है। इसके अलावा कुर्सी से उठकर तीन मीटर चलकर बैठ जाना भी इसका लक्षण है। वृद्धावस्था में व्यक्ति को विटामिन डी की अधिक खुराक लेनी चाहिए। प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए। व्यायाम नियमित करें तो मांसपेशियों में सिकुड़न नहीं आएगी। व्यक्ति को शरीर के वजन के हिसाब से प्रति किग्रा एक ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन लेनी चाहिए।
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