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World Suicide Prevention Day: गांवों में भी घुसा रील लाइफ का जाल, 60% महिलाएं अवसाद में मिलीं, पढें डिटेल

Wed, 10 Sep 2025 10:00 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य के सीएचसी में लगे मेगा कैंपों में आईं 60 फीसदी महिलाओं में अवसाद-एंजाइटी मिली है। यही नहीं, रील लाइफ जैसा ग्लैमर नहीं मिलने पर आत्महत्या के विचार आ रहे हैं।
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हेल्थ कैंप में चेकअप करते चिकित्सक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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  • केस-एक: घाटमपुर की 32 वर्षीय युवती ने एक बार आत्महत्या की कोशिश की। देर रात तक रील देखने से दिनचर्या बदल गई। इससे पारिवारिक कलह बढ़ गई। गहरे अवसाद की स्थिति में आने पर आत्महत्या के विचार आने लगे। काउंसलिंग और दवाओं से आराम मिला।
  • केस-2: सरसौल की 24 वर्षीय युवती रात भर सोशल मीडिया, रील देखने से अनिद्रा की शिकार हो गई। चक्कर, बेहोशी के लक्षण आ गए। अवसाद और एंजाइटी बढ़ गई। जीवन बेमतलब लगने लगा, आत्महत्या के विचार आने लगे। इलाज चल रहा है।
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भागदौड़, आपाधापी वाली शहरी संस्कृति के झंझटों से मुक्त माने जाने वाला ग्रामीण परिवेश बदल गया है। इस बदलाव से महिलाएं अधिक प्रभावित हो रही हैं। सोशल मीडिया की रील लाइफ जैसा ग्लैमर जब उन्हें अपने पास नहीं मिलता तो उनमें अवसाद और एंजाइटी बढ़ रही है। इससे उन्हें आत्महत्या के विचार आने लगते हैं। यह खुलासा नगर के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे मानसिक स्वास्थ्य मेगा कैंपों में आए रोगियों से हुआ। 60 फीसदी महिलाएं अवसाद में मिलीं।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक सीएचसी में साल में एक मेगा मानसिक स्वास्थ्य कैंप लगाया जाता है। वर्ष 2024 में घाटमपुर, सरसौल, बिल्हौर, चौबेपुर, शिवराजपुर, बिधनू, भीतरगांव और पतारा में लगे आठ मेगा कैंपों में 2200 लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया। कैंप में आईं 1320 महिलाओं में अवसाद और एंजाइटी मिली। इस वजह से इनमें आत्महत्या के विचार आ रहे थे। मुख्य वजह पारिवारिक कलह पाई गई। सोशल मीडिया से भ्रम की स्थिति भी मिली है।

20 से 40 वर्ष के बीच रहा महिलाओं का आयु वर्ग
मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता संदीप सिंह ने बताया कि महिलाओं में रात-रात भर रील देखने से अनिद्रा की समस्या भी एक कारण रहा है। पुरुषों में अवसाद का मुख्य कारण परिवार में सामंजस्य न होना और बच्चों के भविष्य को लेकर एंजाइटी अधिक रही। लोग इंटरनेट सिंड्रोम की गिरफ्त में पाए गए। मेगा कैंप में आईं महिलाओं का आयु वर्ग 20 से 40 वर्ष के बीच रहा है। पुरुषों का आयु वर्ग 40 से अधिक रहा है। कैंपों में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. चिरंजीवी, डॉ. आरपी कुशवाहा, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सुधांशु मिश्रा ने जांच की।
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शिविर में ये रोगी भी मिले
सीएचसी पर लगे मानसिक स्वास्थ्य मेगा कैंपों में मेनिया, सीजोफ्रेनिया, ओसीडी के भी रोगी मिले हैं। इसके अलावा कुछ रोगी मिर्गी के लक्षणों वाले और मंदबुद्धि के भी आए।
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