विश्व रैबीज दिवस आज है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रैबीज के लिए चार जानवरों के काटने को जिम्मेदार माना है। इनमें कुत्ता, बंदर, सियार और नेवला है। अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन लगवाने वाले मामलों में 98 फीसदी केस डॉग बाइट यानी कुत्ता काटने के आ रहे हैं।
उर्सला समेत अन्य अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में रोज कुत्ते काटने के 30 नए और 70 पुराने रोगी आ रहे हैं। बारिश में इक्का-दुक्का केस नेवला काटने के आते हैं। दो फीसदी केस में ज्यादातर मामले बंदर काटने के होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में जागरुकता आई है। लोग टीके लगवा लेते हैं इससे रैबीज के केस बहुत कम हो गए हैं।
कोरोना काल में उर्सला समेत अन्य अस्पतालों में रोज आने वाले रैबीज के मामलों में 98 फीसदी केस कुत्ते काटने के हैं। इनमें 30 फीसदी नए और 70 फीसदी फॉलोअप में आते हैं। कहीं-कहीं कटखने बंदर की शिकायतें मिलती हैं। उर्सला में साल में एक-दो केस नेवला और सियार के काटने के आते हैं। जंगल और झाड़ियों के कट जाने से सियार के मामले कई स्वास्थ्य केंद्रों पर सालों से नहीं आए हैं।