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जरायम की दुनिया: चिंता! दबंग दिखने के लिए कदम रख रहे हैं युवा, महंगा शौक जुर्म की दलदल में धकेल रहा

Tue, 18 Apr 2023 05:52 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

Hamirpur News: महंगी बाइक, मोबाइल और असलहों का शौक युवाओं को जुर्म के दलदल में धकेल रहा है। युवा अब अपराध की दुनिया में धमक जमाने लगे हैं। इधर चोरी, लूट आदि की घटनाओं के बाद इसका खुलासा हुआ है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हमीरपुर जनपद के युवाओं में दबंग छवि का क्रेज हावी है। अवैध असलहे लहराते हुए फोटो वायरल करना आम बात हो गई है। दबंग छवि की चाह में युवा जरायम की दुनिया में कदम रखने से नहीं हिचकते। जिसका अंजाम उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

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सरीला व राठ क्षेत्र में बिच्छू गैंग इसका उदाहरण है। करीब पांच साल से आतंक का पर्याय बने इस गैंग में किशोर व युवा शामिल हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में है। शुरूआत में मामूली विवाद में मारपीट व फायरिंग करना इस गैंग की पहचान थी। अब मारपीट, लूट, आगजनी आदि घटनाओं में इस गैंग के युवाओं का नाम आ रहा है।
इनकी दहशत इस कदर बन चुकी है कि आम लोग इनके खिलाफ जुबान खोलने से डरते हैं। छोटी वारदातों से इनके हौसले बढ़ते जाते हैं। वहीं बड़ी गैंग व माफिया भी ऐसे युवाओं को बरगलाने में पीछे नहीं रहते। हाल ही में माफिया अतीक अहमद हत्याकांड में शामिल युवाओं से इस बात को बल मिलता है।

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सफेदपोशों के संरक्षण से बढ़ रहा हौसला
अधिवक्ता जमुनादीन राजपूत अराजक युवाओं पर सफेदपोश भी अपना हाथ रख देते हैं, जिससे उनका स्वार्थ सिद्ध होता है। शुरुआती आपराधिक गतिविधियों में सफेदपोश बीच बचाव कर मामले को बीच में ही निबटा देते हैं। संरक्षण मिलने से इन युवाओं के हौसले बुलंद होते हैं और यह वारदातों को अंजाम देने में नहीं हिचकते।

जुए के फड़ों से मिल रहा पोषण
समाजसेवी देव नारायण लोधी कहते हैं कि नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जुए के बड़े फड़ संचालित होते हैं। इन फड़ों के संचालकों की प्रतिदिन की कमाई लाखों में होती है। उन्हें विवादों के निबटारे के लिए इस तरह के युवाओं की जरूरत होती है, जिसके बदले में अच्छी खासी रकम भी दी जाती है।
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बच्चों की बर्बादी में अभिभावक भी जिम्मेदार
सुनील नगायच युवाओं के अपराध क्षेत्र में जाने में उनके अभिभावक भी जिम्मेदार होते हैं। कम उम्र में बच्चों को बाइक, महंगा मोबाइल व खर्च के लिए मनमाना पैसा देना शान समझते हैं। इससे किशोर व युवाओं की जरूरतें बढ़ती जाती हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अपराध का रास्ता चुनते हैं।
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