कोरोना काल के चलते इस बार वर्ल्ड किडनी डे (11 मार्च) की थीम ‘गुर्दा बीमारी के साथ अच्छी तरह जीओ' रखी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का जोर सबसे अधिक गुर्दे की सेहत पर है। कोरोना का हमला गुर्दे पर भी हुआ है। कोरोना संक्रमितों में 20 फीसदी के गुर्दों में खराबी आई है।
इसकी दवा खाने से पांच फीसदी रोगियों के गुर्दे खराब हुए हैं। मतलब कोरोना काल में गुर्दा रोगियों की संख्या में 25 फीसदी इजाफा हुआ। कानपुर किडनी फाउंडेशन के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। कुछ रोगियों के गुर्दा रोग दबा हुआ था और कोरोना संक्रमण के बाद उभर आया।
कानपुर किडनी फाउंडेशन ने यह सर्वे 848 कोरोना संक्रमितों पर किया है। इनमें 40 फीसदी लोगों की किडनी पहले से खराब थी। कोरोना संक्र मण के बाद उनका सीरम क्रेटेनिन डेढ़-दो मिलीग्राम से बढ़कर चार मिलीग्राम तक पहुंच गया। इन रोगियों को डायलिसिस की जरूरत अधिक पड़ी। इसके अलावा रेमडेसिविर खाने से भी रोगियों के गुर्दों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
कोरोना की वजह से 10 से 20 फीसदी संक्रमितों के गुर्दों में खराबी आई है। इसके साथ ही इसकी दवा के साइड इफेक्ट्स से करीब पांच फीसदी के गुर्दे खराब हुए हैं। कोरोना ठीक होने के बाद जब रोगियों का इलाज किया तो असर कम हुआ। गुर्दे में सुधार होने लगा। कोरोना की दवा के केमिकल की वजह से ऐसा असर हुआ।- डॉ. डीके सिन्हा
ऐसी आई गुर्दों में खराबी
वायरस के केमिकल साइटोकोन खून की नलियों में जाकर जमता है, जिससे गुर्दे की नसें सिकुड़ जाती हैं। गुर्दे को खून कम मिलता है। इससे गुर्दे की छन्नियां खराब हो जाती हैं और किडनी का आउटपुट घट जाता है। इसी तरह कोरोना की दवा के केमिकल भी किडनी की संरचना पर दुष्प्रभाव डालते हैं। जिनसे छन्नियां खराब होती हैं। किडनी के साइज पर असर पड़ता है। सीरम क्रेटेनिन खून में बढ़ने लगता है।
उर्सला में किडनी रोगियों की फ्री डायलिसिस
शासन की योजना के तहत जिला अस्पताल उर्सला में गुर्दा रोगियों की मुफ्त डायलिसिस की जाती है। पीपीपी मोड में वाराणसी की कंपनी यहां डायलिसिस यूनिट का संचालन करती है। इस वक्त 63 रोगी डायलिसिस करा रहे हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल निगम ने बताया कि महीने में छह-सात सौ डायलिसिस होती हैं। इसके अलावा अस्पताल की अपनी अलग डायलिसिस यूनिट है।
गुर्दे खराब होने के लक्षण
- पेशाब में खून आना
- पेशाब में जलन होना, बार-बार पेशाब आना
- जल्दी थकन महसूस होना
- ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
- पेशाब की मात्रा में कमी आना
बचाव
- नियमित व्यायाम करें
- रोजाना तीन लीटर पानी पिएं
- धूम्रपान, शराब और फास्ट फूड से बचें
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें
- ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं
- दर्द की गोलियां अनावश्यक न लें
- 35 साल की उम्र के बाद खून और पेशाब की जांच कराएं
पेशेंट फोरम में गुर्दा रोगी दूर करें मर्ज के संबंध में भ्रम
विश्व गुर्दा दिवस पर गुरुवार को पेशेंट फोरम का आयोजन किया जाएगा। इसमें गुर्दा रोगी अपनी बीमारी से संबंधित कोई भी सवाल कर निशुल्क जानकारी हासिल कर सकते हैं। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. देशराज गुर्जर और बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. मनीष वर्मा ने बुधवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों को बताया कि पेशेंट फोरम का आयोजन दोपहर 12 बजे से दो बजे तक शारदानगर स्थित फॉर्चून अस्पताल में किया जाएगा।
डॉ. गुर्जर ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग है और पैरों में सूजन रहती है तो उसे गुर्दे की जांच करानी चाहिए। बार-बार पेशाब जाना, पेशाब में जलन भी गुर्दा रोग के लक्षण हैं। इसके अलावा किसी के परिवार में गुर्दा रोग की हिस्ट्री है तो वे भी एहतियात बरतें। उन्होंने बताया कि पेशेंट फोरम में आने वाले लोगों को जांचों और इलाज में छूट दी जाएगी।