ताजा सैंपलिंग सर्वे में इनका संख्या तकरीबन 10 फीसदी हो गई है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद जो लोग डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उनमें 20 फीसदी डायबिटिक हो गए हैं। इसके अलावा युवाओं में नशे की लत, स्ट्रेस और नींद पूरी न होने समेत तमाम वजहों से इसकी दिक्कत हो रही है। प्रदूषण भी अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज बढ़ाने का कारण है। कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी का कहना है कि युवाओं में स्ट्रेस अधिक होने, खानपान में लापरवाही के कारण इंसुलिन रिसेस्टेंट बढ़ रहा है। सबसे मुश्किल यह है कि 80 फीसदी रोगी डायबिटीज का इलाज देर में लेते हैं। किसी और मर्ज होने पर जांच किए जाने पर पता चलता है।
मानक
खाली पेट
100 मिली खून में 70 ले 100 मिग्रा शुगर तो सामान्य
100 मिली खून में 100 से 125 मिग्रा शुगर बॉर्डर तो लाइन
100 मिली खून में 126 मिग्रा या इससे अधिक शुगर तो डायबिटीज
ऐसे करें बचाव
- तली-भुनी चीजों, जंक फूड से परहेज करें।
- फल, सलाद और मिश्रित अनाज का सेवन करें।
- नींद पूरी लें, इसके साथ ही खुश रहें, स्ट्रेस से दूर रहें।
- प्रदूषित स्थानों पर मास्क लगाकर जाएं।
- नियमित कसरत करें।
- नाश्ता भरपूर करें और डिनर हल्का लें।
- खाने के तुरंत बाद मत सोएं।
- डिनर सोने के एक से डेढ़ घंटे पहले करें।