कार्यक्रम के दौरान सुझाव देते डॉ. आलोक बाजपेई
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कार्यक्रम में संयुक्त सचिव राधिका स्वरूप, साकेत तिवारी, प्राचार्य रत्ना गुप्ता और संचालिका अंकुर सिंह की उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और समावेशी शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया। डॉ. बाजपेई ने कहा कि समय पर पहचान और उचित प्रशिक्षण से ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर काम करने की सलाह दी, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके। कार्यक्रम में छात्राओं और शिक्षकों ने भी भाग लिया और ऑटिज्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। अंत में जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी को इस विषय पर समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का आह्वान किया गया।