राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाएगा। इससे
वह अपने घर परिवार को और अधिक मजबूत कर सकें। स्वयं सहायता समूह के माध्यम
से महिलाएं आपस में जुड़कर स्वरोजगार अपना सकती हैं। उनके इस कार्य में
बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह बात राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
के ऋण वितरण मेगा शिविर के प्रभारी जिलाधिकारी ने कही। इस दौरान 103 स्वयं
सहायता समूहों को रिवाल्विंग स्वीकृति पत्र व 97 क्रेडिट लिकेंज किया गया।
जबकि 21 समूहों को क्रेडिट चेक दी गई।
सोमवार को माती मुख्यालय स्थित
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण परिसर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का
फंड, ऋण वितरण का मेगा शिविर आयोजित किया गया।
शिविर का मुख्य उद्देश्य
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार सृजन, लघु कुटीर उद्योग के
लिए प्रोत्साहन व आर्थिक सहायता की जानकारी देना था।
कार्यक्रम का
शुभारंभ विशिष्ट अतिथि प्रभारी जिलाधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव ने द्वीप
प्रज्ज्वलन कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका
मिशन महिलाओं के विकास से जुड़ा कार्यक्रम है।
उन्होंने कहा कि समूह चलाना
एक चुनौती है। महिलाएं उत्साह और सहयोग की भावना को रखकर 11 महिला सदस्य को
जोड़कर एक समूह की स्थापना कर समूह का संचालन कर रही है। समूह मे कोई
रुकावट नही है और इसमे केवल महिला सदस्य ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह
समय-समय पर समूह के सदस्यों से दिए गए ऋण की जानकारी लेते रहेंगे। सभी
समूह दिए गए ऋण का सदुपयोग करें।
इस दौरान 103 समूहों को रिवाल्विंग
स्वीकृति पत्र व 97 क्रेडिट लिंकेज दी गई, जिसमें 21 समूहों की महिलाओं को
प्रभारी जिलाधिकारी ने अपने हाथों से क्रेडिट लिकेंज दिया।
मेगा शिविर
के दौरान परियोजना निदेशक विवेक त्रिपाठी ने बताया कि पहले समूह में पुरूष व
महिला दोनों शामिल किए गए थे। लेकिन अब महिलाएं ही इस समूह का हिस्सा हैं।
योजना में पहले सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता था। जिसे अब समाप्त कर
दिया गया है।
इस दौरान बैंक आफ बड़ौदा के एलडीएम सुनील शुक्ला ने कहा
कि समूहों की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के बारे में
लोगों को जागरूक करें। जिससे सभी को इसका लाभ मिल सके।
मेगा शिविर के दौरान बीडीओ, महिला स्वयं सहायता समूहों की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यों सहित महिलाएं मौजूद रहीं।