कानपुर। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ जल्द ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से लेकर उपयोग पर काम करेंगे, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यहां ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन इनोवेटिव एंड इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम फॉर ग्रीन हाइड्रोजन (इकोजेन)’ के प्रस्ताव को राज्य सरकार की अधिकृत समिति से मंजूरी मिल गई है। इसे उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
सेंटर के बनने से उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकेगी। यह राज्य के नेट-ज़ीरो प्रदूषण लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही संस्थान में बहुविषयक शोध को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों के साथ सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। सेंटर का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सतत ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर प्रबोध बाजपेयी (प्रधान अन्वेषक) कर रहे हैं। उनके साथ विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ शोधकर्ता और वैज्ञानिक टीम का हिस्सा बनेंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अंतर्गत होंगे कार्य
- ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर उन्नत शोध कार्य होंगे।
- हाइड्रोजन के सुरक्षित भंडारण का विकास किया जाएगा।
- ऊर्जा, परिवहन, उद्योग में हाइड्रोजन के उपयोग पर काम होगा।
- उद्योगों के साथ प्रोटोटाइप और पायलट प्रोजेक्ट तैयार होगा।
- नए स्टार्टअप होंगे, जिससे इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सकेगा।
आयातित ईंधन पर निर्भरता होगी कम
सेंटर के बनने से प्रदूषण में कमी आएगी। स्वच्छ ईंधन होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी। स्टील, रिफाइनरी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सस्ती हरित ऊर्जा मिलेगी।